झारखंडी संस्कृति की पहचान है जतरा

Updated at : 28 Oct 2015 1:54 AM (IST)
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झारखंडी संस्कृति की पहचान है जतरा

लोहरदगा : किस्को प्रखंड क्षेत्र के बड़चोरगाई में जतरा का आयोजन किया गया. जिसमें छोटचोरगांई, मेरले, जोगियारा, अगरडीह, जम्हरे सहित अन्य गांव के खोड़हा शामिल हुए. मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत मौजूद थे. उन्हाेंने कहा कि जतरा झारखंडी संस्कृति की पहचान है. जतरा दिलों से रिश्ता जोड़ने का माध्यम है. यह पूर्वजों की […]

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लोहरदगा : किस्को प्रखंड क्षेत्र के बड़चोरगाई में जतरा का आयोजन किया गया. जिसमें छोटचोरगांई, मेरले, जोगियारा, अगरडीह, जम्हरे सहित अन्य गांव के खोड़हा शामिल हुए. मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत मौजूद थे. उन्हाेंने कहा कि जतरा झारखंडी संस्कृति की पहचान है.
जतरा दिलों से रिश्ता जोड़ने का माध्यम है. यह पूर्वजों की सांस्कृतिक धरोहर है.जतरा में सभी वर्गो की भागीदारी होती है, जिससे लोगों में आपसी भाईचारगी को बल मिलता है. हमें झारखंडी संस्कृति को और मजबूत करने की आवश्यकता है.
श्री भगत खोड़हों के साथ नृत्य किये एवं मांदर भी बजाया. मौके पर अनुपमा भगत, अभिनव सिद्धार्थ, मनोज सोन तिर्की, अनमोल भगत, सूरज उरांव, कीर्ति चंद्र भगत, राजू उरांव, रामजीत उरांव, चुन्नी उरांव, सोनमईत उरांव, शालिग्राम उरांव, जगेश्वर उरांव, शंकर उरांव, विफई उरांव आदि मौजूद थे.
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