पलायन कर गया बंदे का परिवार

Updated at : 14 Oct 2015 4:08 AM (IST)
विज्ञापन
पलायन कर गया बंदे का परिवार

सूबे में खेतों की स्थिति बेहद खराब है. किसान परेशान हैं. राज्य के लगभग हर जिले में यही मंजर है. भदई फसल खराब हो चुकी है. रबी के आसार भी कम हैं. अगस्त व सितंबर माह में बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें आ गयी हैं. कुछ किसानों का कहना है कि 1966-67 जैसी […]

विज्ञापन

सूबे में खेतों की स्थिति बेहद खराब है. किसान परेशान हैं. राज्य के लगभग हर जिले में यही मंजर है. भदई फसल खराब हो चुकी है. रबी के आसार भी कम हैं. अगस्त व सितंबर माह में बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें आ गयी हैं. कुछ किसानों का कहना है कि 1966-67 जैसी स्थिति है.

जुलाई में अच्छी बारिश होने के कारण पूरी पूंजी लगा दी, कर्ज लेकर बुआई की. अब खेतों में ही धान की फसल पुआल में तब्दील हो गयी है. मकई की फसल भी बरबाद हो चुकी है. किसानों की कमर टूट गयी है. हम यहां एक-एक कर गांवों की तसवीर पाठकों के सामने रखेंगे, ताकि स्थित की भयावहता को समझा जा सके.

लोहरदगा : मौसम की मार के चलते किस्को प्रखंड के गोसाई टोला निवासी 60 साल के बंदे उरांव का परिवार पलायन कर गया. काम की तलाश में यह परिवार हाजीपुर ईंट भट्टा में चला गया. बंदे ने तीन एकड़ में धान की फसल लगायी थी, जो पानी के अभाव में बरबाद हो गयी है. इस क्षेत्र के अन्य किसान भी फसल बरबाद होने से परेशान हैं और पलायन की तैयारी कर रहे हैं.

बंदे के परिवार में कुल छह सदस्य हैं. बंदे को छोड़ परिवार के सभी सदस्य एक सप्ताह पहले ही हाजीपुर चले गये. बंदे उरांव का कहना है कि इस बार मौसम ने धोखा दिया. बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती बरबाद हो गयी. तीन एकड़ भूमि में धान की खेती की थी, लेकिन किसी भी खेत में धान नहीं हुआ. पौधे बड़े होने के बजाये पीले होकर सूख गये.

पत्नी लिलमनी, बेटा एतवा उरांव, बहु मुनी उरांव, पोता ललित उरांव एवं मंटू उरांव ने देखा कि अब धान नहीं होगा, तो काम की तलाश में घर छोड़ दिये. बंदे का कहना है कि कर्ज लेकर धान की खेती की थी, लेकिन प्रकृति ने ऐसा मारा कि सब कुछ बरबाद हो गया. अब रोजी-रोटी के लाले पड़ गये हैं. जिले में बारिश नहीं होने के कारण अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

धान के खेतों में दरार पड़ गयी है. जिस वक्त धान की रोपनी हो रही थी, उस समय अच्छी बारिश हुई. लोगों को खुशी थी कि वर्षों बाद अच्छा मानसून आया है, लेकिन वक्त गुजरने के साथ मानसून ने धोखा दिया. धान रोपनी के बाद जो बारिश बंद हुई , वो आज तक बंद है. फसल मुरझा गयी. कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि अब बारिश की संभावना नहीं है और यदि बारिश होगी भी तो धान की खेती को लाभ नहीं होगा.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola