प्रकृति की बेरूखी से किसानों की कमर टूटी

Updated at : 12 Oct 2015 6:16 PM (IST)
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प्रकृति की बेरूखी से किसानों की कमर टूटी

लोहरदगा : जिले में बारिश नहीं होने के कारण अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. धान के खेतों में दरार पड़ गयी है. किस्को प्रखंड क्षेत्र के नारी गांव में तो स्थिति और भी भयावह है. यहां के किसान अपने खेत को देख कर आंसू बहाने को विवश हैं. जिस वक्त धान की रोपनी […]

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लोहरदगा : जिले में बारिश नहीं होने के कारण अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. धान के खेतों में दरार पड़ गयी है. किस्को प्रखंड क्षेत्र के नारी गांव में तो स्थिति और भी भयावह है. यहां के किसान अपने खेत को देख कर आंसू बहाने को विवश हैं. जिस वक्त धान की रोपनी हो रही थी, उस समय बारिश बहुत अच्छी हुई. लोगों को खुशी थी कि वर्षो के बाद इतना बेहतर मानसून आया है, लेकिन वक्त गुजरने के साथ मानसून ने धोखा देना शुरू किया और धान रोपनी के बाद से जो बारिश बंद हुई वो आज तक बंद है.

फसल पीला होकर मुरझा गया. किसानों का कहना है कि बारिश के कारण जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है. प्रकृति ने हमारी कमर तोड़ दी है. कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि अब बारिश की संभावना नहीं है और यदि बारिश होगी भी तो धान की खेती को लाभ नहीं होगा. किसान पलायन का मन बना रहे हैं. कई किसानों ने अपने खेतों को भगवान भरोसे छोड़ कर घर में ताला बंद करके रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश चले गये. अभी जो किसान बचे हैं, वे अपने भाग्य पर आंसू बहाने को विवश हैं.

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