बरामदे में चल रहा इलाज

Published at :23 Jul 2014 12:54 AM (IST)
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बरामदे में चल रहा इलाज

हाल सदर अस्पताल का बीमारियों का प्रकोप बढ़ा, लोग परेशान लोहरदगा : बरसात का मौसम आते ही जिले में बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है. सरकारी एवं निजी क्लिनिकों में मरीजों की लंबी कतार देखी जा रही है. सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी, दस्त के आ रहे हैं. सदर अस्पताल लोहरदगा में प्रतिदिन […]

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हाल सदर अस्पताल का

बीमारियों का प्रकोप बढ़ा, लोग परेशान

लोहरदगा : बरसात का मौसम आते ही जिले में बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है. सरकारी एवं निजी क्लिनिकों में मरीजों की लंबी कतार देखी जा रही है. सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी, दस्त के आ रहे हैं. सदर अस्पताल लोहरदगा में प्रतिदिन लगभग 300 मरीज आउटडोर में इलाज कराने पहुंच रहे हैं. मरीज परेशान हैं.

क्योंकि यहां 30 बेड की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन भरती मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण बरामदे मे भी इनका इलाज किया जा रहा है. सदर अस्पताल परिसर में ही सौ बेड के अस्पताल का निर्माण कराया गया, लेकिन विशेष प्रमंडल द्वारा लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से बनाये गये इस अस्पताल का निर्माण कार्य इतना घटिया है कि इसे शुरू नहीं किया जा सका है. अभियंताओं की गड़बड़ी का खामियाजा यहां के मरीज भुगतने को विवश हैं. प्रशासनिक स्तर पर भी अब तक किसी तरह की कार्रवाई की सूचना नहीं है.

जिले में मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. सदर अस्पताल एवं निजी क्लिनिकों में काफी संख्या में मलेरिया के रोगी पहुंच रहे हैं. जुलाई माह में 80 मरीजों की पहचान सरकारी स्तर पर हुई है. जिन्हें मलेरिया है. लोहरदगा प्रखंड में 13, कुडू प्रखंड में 19, किस्को प्रखंड में 27, भंडरा प्रखंड में 2, सेन्हा प्रखंड में 25 रोगी चिह्न्ति किये गये हैं. विभाग द्वारा न तो अब तक डीडीटी का छिड़काव कराया गया और न ही मेडिकेटेड मच्छरदानी का वितरण ही किया गया. इस मौसम में झोला छाप डॉक्टरों की चांदी है.

देहाती एवं पहाड़ी क्षेत्र में जहां सरकारी चिकित्सक नहीं जाते हैं. खास कर उन इलाकों में झोला छाप डॉक्टरों का वर्चस्व है. तुरंत पानी चढ़ा देना, ऑपरेशन कर देना, इनके लिए आम बात हो गयी है. इनके चक्कर में पड़ कर सैकड़ों लोग बेमौत मारे जा रहे हैं. पिछले दिनों सदर ब्लॉक के सामने एक क्लिनिक में एक लड़की का गर्भपात करा दिया गया. जिले के पहाड़ी इलाकों में भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी है. इस ओर न तो सिविल सजर्न का ध्यान है और न ही जिला प्रशासन ही ऐसे लोगों पर अंकुश लगा रहा है.

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