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व्यायाम व शारीरिक क्रियाकलापों की कमी से बढ़ रही है बीमारियां

Updated at : 07 Apr 2019 12:59 AM (IST)
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व्यायाम व शारीरिक क्रियाकलापों की कमी से बढ़ रही है बीमारियां

लोहरदगा : विश्व स्वास्थ्य दिवस के पूर्व संध्या पर एमएलए महिला कॉलेज में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार, डॉ गणेश प्रसाद मौजूद थे. मौके पर सीएस ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में निरंतर सुधार हो रहा है पर चिंता इस […]

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लोहरदगा : विश्व स्वास्थ्य दिवस के पूर्व संध्या पर एमएलए महिला कॉलेज में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार, डॉ गणेश प्रसाद मौजूद थे. मौके पर सीएस ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में निरंतर सुधार हो रहा है पर चिंता इस बात की है कि जागरूकता की कमी आज भी बनी हुई है.

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप डॉक्टर, अंधविश्वास और झाड़-फूंक से बच्चे पोलियो, मिजिल्स रूबेला, टीबी, मलेरिया, फाइलेरिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण नहीं कर पाते है. उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बहुत अच्छा काम किया है. किशोरियां पहले से अधिक जागरूक हो गयीं हैं.
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालनेवाली चीजों से दूर रहें. सीएस ने सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में बताया. मौके पर डॉ गणेश प्रसाद ने कहा कि झाड़-फूंक में आज भी काफी लोग विश्वास रखते हैं. ऐसे लोग आज भी आते हैं और कहते हैं कि जांडिस हो गया था. झाड़-फूंक करा दिये हैं. अब कोई दवा दे दीजिए. सफेद जौंडिस जैसा शब्द जानकारी के अभाव में गढ़ दिया गया है. असल में यह एनीमिया होता है. हेल्थ एजुकेशन के प्रसार की आवश्यकता है.
इंफेक्शन से बच्चों को लूज मोशन होता है जबकि परिवार के लोग समझते हैं कि दांत निकलने की वजह से ऐसा हो रहा है. लापरवाही की वजह से बच्चा डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है. मौत तक हो जाती है पढ़े-लिखे और जागरूक लोगों को समाज को जागरूक करना चाहिए. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की बात विश्व स्वास्थ संगठन कहता है, मगर इसका तात्पर्य गुणवत्तापूर्ण मेडिकल सेवा और सुविधा है. सेल्फ मेडिकेशन एक खतरनाक प्रवृत्ति है. अन्य देशों में खुद से दवा खरीदना नियमों के दायरे में नहीं है. गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करना प्राथमिकता बनाएं.
मिजिल्स रूबेला चिकन पॉक्स के बारे में बताते हुए कहा कि रुबेला बाद में गर्भपात जैसी गंभीर समस्या खड़ी करता है. टीका की भूमिका पर चर्चा की. प्रीवेंटिव, क्यूरेटिव और रिहैबिलिटेशन इलाज के बारे में बताया गया. उन्होंने कहा कि शारीरिक क्रियाकलाप बहुत सारी बीमारियों की रोकथाम करते हैं. देश की बड़ी आबादी व्यायाम से दूर रह रही है नतीजा यह है कि भारत 2025 तक मधुमेह रोग का सबसे बड़ा ठिकाना होगा.
स्वास्थ्य केंद्रों के बारे में जानकारी दी और इनका पूरा उपयोग करने को प्रेरित किया. मौके पर छात्राओं के सवालों का जवाब डॉक्टरों ने दिया. इस दौरान प्रिंसिपल प्रो स्नेह कुमार, ब्रजकिशोर बड़ाइक, अवध कुमार मिश्रा, रूणा कुमारी, शकुंतला कुमारी, गीता उरांव, राज किशोर प्रसाद, सहित शिक्षिकाएं एवं छात्राएं मौजूद थे.
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