प्रखंड के बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोयला डंपिंग

Updated at : 11 Jun 2018 5:56 AM (IST)
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प्रखंड के बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोयला डंपिंग

कुड़ू (लोहरदगा) : प्रखंड के बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोयला डंपिंग यार्ड कमले के ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है . डंपिंग यार्ड से हो रहे प्रदूषण के बाद कमले, ओपा, चांपी, छोटकी चांपी के ग्रामीण तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. सबसे बड़ी विडंबना यह है […]

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कुड़ू (लोहरदगा) : प्रखंड के बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के समीप संचालित कोयला डंपिंग यार्ड कमले के ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है . डंपिंग यार्ड से हो रहे प्रदूषण के बाद कमले, ओपा, चांपी, छोटकी चांपी के ग्रामीण तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सब कुछ जानते हुए भी जिला प्रशासन पूरे मामले से बेपरवाह तमाशबीन बना हुआ है. जनता के सेवक कहे जानेवाले जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं. कमले में एक ग्रामीण तीजा उरांव असमय काल के गाल में समा चुका है. जबकि एक ग्रामीण जिन्दगी की जंग लड़ रहा है. बताया जाता है कि छह माह पहले बड़की चांपी रेलवे स्टेशन तथा कमले गांव के समीप कोयला डंपिंग यार्ड का निर्माण कराया गया है. आम्रपाली तथा मगध कोल परियोजना से तीन कंपनियों का कोयला बड़की चांपी पहुंचता है

तथा रैक लोडिंग होकर दूसरे प्रदेशों मे काला सोना भेजा जाता है. बड़की चांपी कोयला डपिंग यार्ड निर्माण का ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के बाद ग्रामीणों की मांग फाईलों मे दफन होकर रह गयी. डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग को लेकर कमले संघर्ष समिति के बैनर तले जोरदार आंदोलन किया गया था. यहां तक कि लोहरदगा-टोरी यात्री ट्रेन को बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के समीप दो घंटे तक रोक दिया गया था. बावजूद इसके कोयला डंपिंग यार्ड हटाना तो दूर, काम जोरशोर से चल रहा है . बॉकी चांपी कोयला डंपिंग यार्ड से हो रहे प्रदूषण के कारण जहां कृषि योग्य भूमि में कोयले का डस्ट भर जा रहा है तो ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.

टीबी , दमा समेत अन्य बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप
बड़कीचांपी कोयला डंपिंग यार्ड के कारण तथा कोयला लदे वाहनों से उड़नेवाले धूल कोयले के डस्ट से पांच गांव कमले , ओपा , छोटकी चांपी , बड़की चांपी , सुकुमार समेत अन्य गांव के ग्रामीण टीबी , दमा समेत अन्य बीमारियो की चपेट में आ रहे हैं. कमले गांव निवासी मजदूर नेता तीजा उरांव की मौत टीबी बीमारी से इलाज के क्रम में इटकी में हो गयी, जबकि कमले निवासी रामवृक्ष मुंडा टीबी बीमारी से ग्रसित होकर जिन्दगी तथा मौत की जंग लड़ रहा है.
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