नहीं बदली कोकर गांव की तकदीर

कुडू (लोहरदगा) : प्रखंड के कोकर गांव के ग्रामीण किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है. मुख्य पथ से गांव जाने वाली सड़क जजर्र है. पेयजल के लिए लगाये गये आधे से ज्यादा चापानल खराब हैं. आंगनबाड़ी केंद्र जजर्र हालत में है. स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. […]
कुडू (लोहरदगा) : प्रखंड के कोकर गांव के ग्रामीण किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है. मुख्य पथ से गांव जाने वाली सड़क जजर्र है. पेयजल के लिए लगाये गये आधे से ज्यादा चापानल खराब हैं. आंगनबाड़ी केंद्र जजर्र हालत में है. स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. गांव के प्राय: लोग किसान हैं. सिंचाई साधन नहीं होने से किसान सिर्फ एक फसल उगाते हैं. यहां की आबादी लगभग सात सौ है. पेयजल की समस्या है.
पीएचइडी के द्वारा आठ चापानल लगाये गये थे. इनमें से पांच खराब पड़े हुए हैं. दो चालू हालत में है. लिहाजा ग्रामीण चुआं का पानी पीते हैं. गांव तक जाने के लिए कच्ची सड़क है. वर्षो पूर्व बनी ग्रेड दो सड़क की हालत खराब है. गांव से तीन किमी दूर हेंजला में स्वास्थ्य उपकेंद्र है. जहां कभी चिकित्सक नहीं मिलते हैं. नतीजा ग्रामीण झोला छाप चिकित्सकों के शरण में जाने को विवश हैं.
15 दिसंबर 2010 को पहुंचे थे गवर्नर
भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर डी सुब्बाराव आउटरिच कार्यक्रम के तहत 15 दिसंबर 2010 को कोकर गांव पहुंचे थे. उनके साथ राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव डॉ अशोक कुमार सिंह, तत्कालीन उपायुक्त रतन कुमार को गांव के ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सिंचाई हेतु सिरीज चेकडैम बनाने को लेकर हस्ताक्षर युक्त आवेदन सौंपे थे. उन्होंने एक माह के भीतर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था. चार वर्ष होने वाले हैं, एक भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. इससे ग्रामीण काफी निराश हैं.
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