सलाना आय पांच लाख, सुविधा नदारद

Updated at : 06 Oct 2017 1:52 PM (IST)
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सलाना आय पांच लाख, सुविधा नदारद

कुड़ू :एकमात्र नाम को लेकर विवादित रेलवे स्टेशन छह साल से बिना नाम का चल रहा है. रेलवे मंत्रालय के रिकाॅर्ड में स्टेशन का नाम बड़की चांपी रेलवे स्टेशन है, लेकिन नाम को लेकर कमले व बड़की चांपी के ग्रामीणों की आपसी विवाद से स्टेशन का नामकरण नहीं हो पाया है. बगैर नाम के भारत […]

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कुड़ू :एकमात्र नाम को लेकर विवादित रेलवे स्टेशन छह साल से बिना नाम का चल रहा है. रेलवे मंत्रालय के रिकाॅर्ड में स्टेशन का नाम बड़की चांपी रेलवे स्टेशन है, लेकिन नाम को लेकर कमले व बड़की चांपी के ग्रामीणों की आपसी विवाद से स्टेशन का नामकरण नहीं हो पाया है. बगैर नाम के भारत में पहली बार कोई रेलवे स्टेशन चल रहा है. रेलवे स्टेशन से सरकार को प्रति वर्ष लगभग पांच लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन सुविधा नदारद है. न छह सालों के बाद भी रेलवे ने किसी अधिकारी व कर्मी की बहाली नहीं की है. कमीशन पर टिकट वितरक काम कर रहा है.
12 नवंबर 2011 को पहली बार लोहरदगा से बड़की चांपी तक चली थी ट्रेन : लोहरदगा-रांची रेल लाइन से यात्री ट्रेन पहली बार लोहरदगा से बड़की चांपी तक 12 नवंबर 2011 को पहुंची थी. पांच साल तक बड़की चांपी से यात्री ट्रेन वापस एक फेरा लगाने के बाद लोहरदगा होते हुए रांची लौट जाती थी. मार्च 2017 से यात्री ट्रेन का बड़की चांपी से टोरी तक परिचालन हुआ. सुबह 11:25 मिनट पर लोहरदगा से बड़की चांपी पहुंचती है. वहां से बोदा होते टोरी जाती है. टोरी से बोदा होते हुए लगभग 1: 50 बजे बड़की चांपी होते लोहरदगा जाती है. यात्री ट्रेन के लोहरदगा जाते पूरा स्टेशन वीरान हो जाता है.
दो गांवों में विवाद में नहीं हो पा रहा स्टेशन का नामकरण
बताया जाता है कि स्टेशन के नामकरण को लेकर दो गांवों में विवाद चल रहा है. रेलवे के रिकॉर्ड में स्टेशन का नाम बड़की चांपी है. जबकि ग्रामीणों का कहना है कि जहां स्टेशन का निर्माण कराया गया है, वह कमले में पड़ता है. कमले के ग्रामीणों की मांग है कि स्टेशन का नाम कमले रखा जाये. जबकि रेलवे के सर्वेक्षण में बड़की चांपी नाम अंकित हो चुका है. इसको लेकर विवाद हो गया है. नतीजा छह साल बाद स्टेशन का नामकरण नहीं हो पाया है.
दो कर्मियों के हवाले है स्टेशन
बड़की चांपी स्टेशन तक यात्री ट्रेन का परिचालन छह साल से हो रहा है. लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी व कर्मी की बहाली रेलवे विभाग ने अभी तक नहीं की है. लोहरदगा के एसएस अनूप कुमार बाखला को बड़की चांपी स्टेशन का स्टेशन अधीक्षक के अतिरिक्त प्रभार में प्रतिनियुक्त किया गया है. कमीशन के आधार पर राम नारायण राम टिकट वितरक की भूमिका अदा कर रहा है. कुल मिला कर बड़की चांपी स्टेशन सुविधाओं का घोर अभाव है .
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