आजादी के बाद भी परहैया परिवार सुविधाओं से वंचित

Updated at : 24 Jul 2017 1:32 PM (IST)
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आजादी के बाद भी परहैया परिवार सुविधाओं से वंचित

किस्को-लोहरदगा : प्रखंड क्षेत्र के अति उग्रवाद प्रभावित देवरिया पंचायत अंतर्गत जोबांग पाटा महुआ के परहैया परिवार बदहाली का जीवन जीने को विवश है़ं पाटा महुआ में वर्षों से परहैया जाति के तीन परिवार के सदस्य रहते है़ं लेकिन ये आजादी के 70 दशक बाद भी सरकार द्वारा संचालित मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. उक्त […]

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किस्को-लोहरदगा : प्रखंड क्षेत्र के अति उग्रवाद प्रभावित देवरिया पंचायत अंतर्गत जोबांग पाटा महुआ के परहैया परिवार बदहाली का जीवन जीने को विवश है़ं पाटा महुआ में वर्षों से परहैया जाति के तीन परिवार के सदस्य रहते है़ं लेकिन ये आजादी के 70 दशक बाद भी सरकार द्वारा संचालित मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.
उक्त परिवारों के लिए अब तक ना तो सड़क, बिजली, पेयजल व राशन कार्ड की व्यवस्था मिल पायी है और न ही इन परिवारों को सरकार द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है.
ज्ञात हो कि किस्को प्रखंड मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर घनघोर जंगल में बसे पाटा महुआ में अब तक सड़क, बिजली, पेयजल सहित सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं नहीं पहुंची है़ इन परिवारों की वस्तुस्थिति को न तो किसी ने गंभीरता से लिया है और न ही इनके दुख-दर्द को समझने का प्रयास किया है.
28 दिसंबर 2016 को पाटा महुआ के एक वृद्ध की मौत ठंड लगने से हो गयी थी.वृद्ध की मौत की खबर अखबारों में छपने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और अपर समाहर्ता रंजीत कुमार सिन्हा तथा बीडीओ सुरेंद्र उरांव यहां इनका हाल जानने का थोड़ा बहुत प्रयास किया. रंजीत सिन्हा ने मृत वृद्ध के बेटे को 20 हजार रुपये मुआवजा राशि व पाटा महुआ के सभी परहैया परिवारों को कंबल देकर उनका हौसला बढ़ाया़ उसके बाद से किसी ने भी इनका हाल जानने का प्रयास नहीं किया़ बड़ी बात तो यह है कि यदि कोई बीमार पड़ जाये तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देंगे. पाटा महुआ में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्वच्छता जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं भी इन परहैया परिवारों के लिए सपना बन कर रह गया है. परहैया परिवार का एकमात्र जीविकोपार्जन का माध्यम सूप बना कर स्थानीय बाजारों में बेचना और अपने परिवार का जीवनयापन करना है.
गांव में बिजली नहीं : टेपी परहैया और किरानी परहैया का कहना है कि बिजली हमारे गांव के लिए ख्वाब बन कर रह गया है. कई बार बिजली बहाल को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन से बात की गयी पर कुछ फायदा नहीं हुआ़
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