हर्ष: लंबे अरसे के बाद नंदिनी डैम से तीन नहरों को मिला पानी, क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर

Updated at : 21 Jul 2017 12:27 PM (IST)
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हर्ष: लंबे अरसे के बाद नंदिनी डैम से तीन नहरों को मिला पानी, क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर

लोहरदगा: कैरो प्रखंड क्षेत्र में बने नंदिनी जलाशय से लोगों की उम्मीद पूरी हो रही है. नंदिनी डैम का निर्माण संयुक्त बिहार में 1983-84 में कराया गया था. नंदिनी डैम से तीन नहर निकाली गयी है. मुख्य नहर के अलावा पूर्वी एवं पश्चिमी किनारे नहर बनाया गया है. नहर के निर्माण होने के बाद इस […]

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लोहरदगा: कैरो प्रखंड क्षेत्र में बने नंदिनी जलाशय से लोगों की उम्मीद पूरी हो रही है. नंदिनी डैम का निर्माण संयुक्त बिहार में 1983-84 में कराया गया था. नंदिनी डैम से तीन नहर निकाली गयी है. मुख्य नहर के अलावा पूर्वी एवं पश्चिमी किनारे नहर बनाया गया है. नहर के निर्माण होने के बाद इस क्षेत्र के लोग खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गये थे.

वर्ष 2005-06 से नहर में मिट्टी भरने एवं मेढ़ टूट जाने के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिलने लगा. लोग पलायन करने लगे. लोगों को खेती में परेशानी का सामना करना पड़ा. लोग स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहर की मरम्मत को लेकर पहुंचने लगे. पुन: 2012-13 में नंदिनी जलाशय से निकली तीनों नहरों का जीर्णोद्धार लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया. इस दौरान लगभग तीन वर्षों तक किसानों को इसका लाभ नहीं मिला किंतु इस वर्ष तीनों नहरों की मरम्मत करा कर खरीफ फसल के लिए डैम से पानी छोड़ा गया है. इस वर्ष किसान खुश हैं. इन लोगों का कहना है कि प्रखंड क्षेत्र में बना डैम का लाभ अब मिल सकेगा.

पानी नहीं छोड़े जाने से बेरोजगार हुए थे किसान
डैम के साथ ही नहरों के निर्माण के बाद क्षेत्र के किसानों ने खरीफ एवं रबी फसल सहित सब्जी का उत्पादन प्रारंभ किया. क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भर हो गये थे. क्षेत्र से पलायन रूक सा गया था. इसके कुछ दिनों बाद नहरों में खराबी के कारण डैम से छोड़ा गया पानी गांवों तक नहीं पहुंचने लगा. इसके बाद किसान पुन: बेरोजगार हो गये और फिर पलायन का रास्ता खोजने लगे. इस वर्ष नहरों में पानी छोड़ा गया है. किसान अब अच्छी फसल की उम्मीद में हैं.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की थी योजना
क्षेत्र के किसानों की मांग पर तत्कालीन उपायुक्त अराधना पटनायक ने 2008-09 में डैम की मरम्मती कराने एवं पर्यटक स्थल के रूप में नंदिनी जलाशय को विकसित करने के उद्देश्य से बोटिंग की व्यवस्था की थी. यह व्यवस्था कुछ दिनों तक चला लेकिन जैसे ही तत्कालीन उपायुक्त का तबादला हुआ पर्यटक स्थल विकसित करने की योजना धरी की धरी रह गयी.
प्रति एकड़ लिया जाता था 60 रुपये टैक्स
नंदिनी जलाशय के बनने के बाद क्षेत्र के किसान तो खुशहाल थे ही, सरकार को भी इससे राजस्व की प्राप्ति हो रही थी. पानी पर टैक्स के नाम पर किसानों से रबी एवं खरीफ फसल के अवसर पर प्रति एकड़ 60 रुपये टैक्स लिया जाता था. जब नहर खराब हो गये और डैम से पानी मिलना बंद हो गया तो किसानों ने टैक्स देना बंद कर दिया. इससे राजस्व में भी नुकसान हुआ.
तीन नहर से हो रही हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई
नंदिनी डैम से निकली मुख्य नहर से अंबवा, चरिमा, नरौली, अकाशी, खंडा, उत्तका, कैरो, नया टोली, सुकुरहुटू, सिंजो, बारडीह के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली. पूर्वी नहर से ख्वास अंबवा, चरिमा, नरैाली, खंडा, उत्तका, कैरो, सढ़ाबे, एड़ादोन, पतराटोली के किसानों को सिंचाई सुविधा मिली. साथ ही पश्चिमी नहर से अकाशी, नरौली, बंडा, बिराजपुर, जामुनटोली, बरटोली, नगड़ा, बसरी के किसानों के खेतों को सिंचाई सुविधा मिली. तीनों नहरों के संचालित होने से इन गांवों के हजारों एकड़ भूमि सिंचित हो रहा है. लोगों को विश्वास है कि इस बार बनाया गया नहर में जल्दी मिट्टी का भराव नहीं होगा तथा मेढ़ ही जल्दी नहीं टूटेगा. नहर विभाग का गैंग खलासी द्वारा तीनों नहरों का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है.
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