चार साल बाद भी नहर का नहीं हुआ जीर्णोद्धार
Updated at : 15 Jul 2017 11:33 AM (IST)
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लोहरदगा : कैरो तथा भंडरा क्षेत्र में निर्मित नंदिनी जलाशय से निकली तीनों नहरों के जिर्णोद्धार का कार्य 18 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है. जीर्णोद्धार कार्य से दर्जनों गांव के किसानों की हजारों एकड़ जमीन सिंचित करने की योजना संवेदक द्वारा कराये जा रहे कार्य की धीमी गति के कारण इस […]
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लोहरदगा : कैरो तथा भंडरा क्षेत्र में निर्मित नंदिनी जलाशय से निकली तीनों नहरों के जिर्णोद्धार का कार्य 18 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है. जीर्णोद्धार कार्य से दर्जनों गांव के किसानों की हजारों एकड़ जमीन सिंचित करने की योजना संवेदक द्वारा कराये जा रहे कार्य की धीमी गति के कारण इस वर्ष भी पूरा नहीं हो सकेगा. क्षेत्र के किसान नहरों के जीर्णोद्धार कार्य की धीमी गति से परेशान हैं.
जीर्णोद्धार कार्य को लेकर शुरू से ही स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा किसान परेशान रहे हैं. संवेदक पर निर्माण कार्य तेजी से कराने का दबाव भी स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा दिया जा रहा है लेकिन संवेदक द्वारा चार वर्षों में भी जीर्णोद्धार कार्य पूरा नहीं हुआ. इसका खामियाजा इस वर्ष भी दर्जनों गांवों के किसान झेलने को विवश हैं. संवेदक द्वारा सिर्फ मुख्य नहर का काम पूरा कराया गया है. पश्चिमी एवं पूर्वी क्षेत्र के नहर का काम अभी भी बाकी है. इन दोनों नहरों में खरीफ और रबी फसल के लिए डैम से पानी नहीं छोड़ा जा सकेगा. दोनों नहरों में मिट्टी कटिंग का काम तो पूरा कर लिया गया है लेकिन जिन स्थानों पर जल जमाव की संभावना को देखते हुए पीचिंग का काम कराया जाना है वह काम पूरा नहीं हो सका है़
इसके कारण जल प्रवाह नहीं हो सकेगा. पूर्वी नहर से ख्वास अंबवा, चरिमा, पचागांई,नरौली, खंडा, उत्तका, कैरो, नयाटोली, एड़ादोन, पतराटोली, सढ़ाबे के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी. इसी तरह पश्चिमी नहर से अकाशी, उतका,कैरो, बंडा, उरांव बंडा, बिराजपुर, नगड़ा, बरटोली, जामुन टोली सहित अन्य गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सकती है़ लेकिन दोनों नहरों में काम अधूरा रहने के कारण इन गांवों के किसान इस वर्ष भी सिंचाई सुविधा से वंचित होंगे. जीर्णोद्धार कार्य शुरू होते ही इन गांवों के किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी लेकिन काम अधूरा होने के कारण ये किसान चिंतित हैं.
किसानों का कहना है कि नहर निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से इस वर्ष भी खेती सही तरीके से नहीं कर पायेंगे और मजबूरन पलायन करना पड़ेगा. जबकि उम्मीद थी कि नहरों की मरम्मत का कार्य पूरा हो जायेगा. नहर में पानी आयेगा तो हमलोग अपने खेतों में फसल उगा कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर लेंगे. अन्य प्रदेशों में बाल-बच्चों को लेकर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी़ लेकिन ऐसा नहीं हुआ़
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