मामूली मरम्मत के अभाव में कबाड़ बनती जा रही एंबुलेंस, कुड़ू में मरीजों की बढ़ी परेशानी

Published by :KumarVishwat Sen
Updated at :13 May 2026 4:59 PM
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Latehar News

लातेहार जिले के कुड़ू के सीएचसी में खड़ी एंबुलेंस. फोटो: प्रभात खबर

Latehar News: लोहरदगा के कुड़ू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार एंबुलेंस खराब होकर कबाड़ बन चुकी हैं. सड़क हादसों के दौरान मरीजों को भारी परेशानी हो रही है. परिजनों को निजी वाहनों पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है, जबकि प्रशासन को कई बार शिकायत भेजी जा चुकी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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कुड़ू से अमित कुमार राज की रिपोर्ट

Latehar News: झारखंड के लोहरदगा जिले के कुड़ू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रांची और लोहरदगा सदर अस्पताल भेजने में भारी परेशानी हो रही है. अस्पताल को सांसद, विधायक और राज्य सरकार की ओर से मिली कई एंबुलेंस मामूली खराबी और रखरखाव के अभाव में कबाड़ बनती जा रही हैं. स्थिति यह है कि बार-बार पत्राचार और शिकायत के बावजूद अब तक खराब पड़ी एंबुलेंस की मरम्मत नहीं हो सकी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

सड़क हादसों के दौरान खलती है एंबुलेंस की कमी

सीएचसी कुड़ू नेशनल हाईवे-39 और नेशनल हाईवे-143 ए के किनारे स्थित है. इस मार्ग से रोजाना कई राज्यों के मालवाहक और निजी वाहन गुजरते हैं. इसके अलावा झारखंड के कई जिलों के लिए यात्री वाहन भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं. वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण सड़क हादसे यहां आम बात हो गई है. जब भी बड़े हादसे होते हैं और घायलों की संख्या बढ़ती है, तब एंबुलेंस की भारी कमी महसूस होती है. मजबूरी में मरीजों के परिजनों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है और मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि एक माह पहले बारातियों से भरी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. उस समय केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध थी, जिसमें सात घायलों को किसी तरह भरकर रांची भेजा गया था.

चार एंबुलेंस बनी कबाड़, तीन ही चालू

कुड़ू सीएचसी में कुल सात एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से चार खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं. निवर्तमान सांसद सह वर्तमान विधायक रामेश्वर उरांव और पूर्व विधायक कमल किशोर भगत द्वारा दी गई एंबुलेंस भी मामूली खराबी के बाद बंद पड़ी हैं. इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से दी गई दो एंबुलेंस भी टायर फटने और इंजन खराब होने के कारण उपयोग में नहीं हैं. फिलहाल दो 108 एंबुलेंस और एक क्रिटिकल केयर एंबुलेंस ही चालू हालत में हैं.

गर्भवती महिलाओं के लिए सहारा बनी 108 सेवा

अस्पताल में उपलब्ध दो 108 एंबुलेंस का उपयोग मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए लोहरदगा सदर अस्पताल पहुंचाने में किया जाता है. ऐसे में सड़क हादसों के घायलों के लिए केवल एक एंबुलेंस बचती है, जो पर्याप्त साबित नहीं हो रही है. स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए अतिरिक्त और दुरुस्त एंबुलेंस की जरूरत है.

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कई बार पत्राचार के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

सीएचसी प्रभारी डॉ. सुलामी होरो ने बताया कि खराब पड़ी एंबुलेंस के संबंध में कई बार जिला प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है. उन्होंने कहा कि मासिक बैठकों में भी इस समस्या को बार-बार उठाया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. उन्होंने बताया कि दो माह पहले तत्कालीन उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद ने अस्पताल निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस दुरुस्त कराने का भरोसा दिया था, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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