प्रोत्साहन मिले, तो समृद्ध हो सकते हैं इचाक के किसान
Updated at : 04 May 2017 9:04 AM (IST)
विज्ञापन

लातेहार : प्रभात खबर में इचाक गांव के किसानों की खबर छपने के बाद रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक दल ने बुधवार को सदर प्रखंड के इस गांव का दौरा किया. विशेषज्ञों ने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानी. कृषि विशेषज्ञ आर कोंड्यायान ने बताया कि यहां के किसान काफी […]
विज्ञापन
लातेहार : प्रभात खबर में इचाक गांव के किसानों की खबर छपने के बाद रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक दल ने बुधवार को सदर प्रखंड के इस गांव का दौरा किया. विशेषज्ञों ने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानी. कृषि विशेषज्ञ आर कोंड्यायान ने बताया कि यहां के किसान काफी मेहनती हैं और बगैर नयी तकनीक का इस्तेमाल कर खेती कर रहे हैं
यदि इन्हें प्रोत्साहित किया जाये तो भविष्य में ये किसान काफी समृद्ध हो सकते हैं और इचाक गांव कृषि मैप पर उभर कर सामने आ सकता है.
मालूम हो इचाक को खीरा गांव के नाम से भी जाना जाता है. यहां का उत्पादित खीरा लातेहार एवं इसके आसपास के बाजारों में भारी मात्रा में बेचा जाता है, साथ ही दूसरे शहरों को निर्यात भी किया जाता है. किसान सूरजमल साव के भाई गणेश प्रसाद ने खीरा उत्पादन से हुई आमदनी का इस्तेमाल इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई के लिए की. दुखी साव का पूरा परिवार खीरा उत्पादन के लिए मशहूर है. वहीं इन किसानों को कृषि विभाग या जिला प्रशासन का कोई सहयोग नहीं मिलता. गांव में सिंचाई की सुविधा भी नहीं है. खेती के लिए किसान खुद पर निर्भर हैं. किसानों ने चिलचिलाती धूप में भी खेतों तक पानी पहुंचा कर लोगों को सस्ता खीरा उपलब्ध कराया है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




