जेल से निकलने के बाद दर-दर भटक रहा राजदेव

Updated at : 24 Feb 2016 12:58 AM (IST)
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जेल से निकलने के बाद दर-दर भटक रहा राजदेव

माओवादी सब जोनल कमांडर राजदेव जी ने किया था वर्ष 2010 में आत्मसमर्पण सुनील कुमार लातेहार : माओवादी सब जोनल कमांडर कुंदन यादव उर्फ राजदेव जी ने 27 जुलाई 2010 को पलामू पुलिस के समक्ष प्रत्यार्पण नीति से प्रभावित हो कर आत्म समर्पण किया था. कुल 14 अपराधिक मामलों में नामजद कुंदन उर्फ राजदेव छह […]

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माओवादी सब जोनल कमांडर राजदेव जी ने किया था वर्ष 2010 में आत्मसमर्पण
सुनील कुमार
लातेहार : माओवादी सब जोनल कमांडर कुंदन यादव उर्फ राजदेव जी ने 27 जुलाई 2010 को पलामू पुलिस के समक्ष प्रत्यार्पण नीति से प्रभावित हो कर आत्म समर्पण किया था. कुल 14 अपराधिक मामलों में नामजद कुंदन उर्फ राजदेव छह जनवरी 2016 को सजा काट कर जेल से निकला, लेकिन अब वह दर-दर की ठोकरें खा रहा है. माओवादियों के खौफ से वह घर नहीं जा रहा है. वह कभी मंदिर, तो कभी रेलवे स्टेशन या रैन बसेरा में दिन गुजार रहा है. क्योंकि माओवादियों ने उसे गद्दार बता कर मौत का फरमान जारी किया है. पुलिस ने भी राजदेव से मुंह मोड़ लिया है. उसे प्रत्यार्पण नीति का पूरा लाभ नहीं मिला है.
नहीं मिला प्रत्यार्पण नीति का लाभ : राजदेव एवं उसके परिजनों का कहना है कि वामपंथी उग्रवादियों के प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास नीति का उसे कोई लाभ नहीं मिला. पुलिस ने उसके परिजनों को पांच लाख रुपये दिये. राजदेव का कहना है कि जेल से निकलने के बाद उसे एक रुपया भी नहीं मिला. उसे सरकारी नौकरी और आवास जैसी सुविधा भी अब तक नहीं मिली है.
क्या है प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास नीति : झारखंड सरकार ने संकल्प संख्या 423 दिनांक 16.02.2006 तथा संकल्प संख्या 369 दिनांक 24.01.2008 के तहत समर्पण करने वाले उग्रवादियों को पुनर्वास अनुदान दो लाख पचास हजार रुपये, आवास, चिकित्सा की व्यवस्था, बच्चों को मैट्रिक तक नि:शुल्क शिक्षा, पुत्रियों की शादी तथा इनाम की राशि भुगतान करने की घोषणा की है.
इस नीति से प्रभावित हो कर राजदेव ने आत्मसमपर्ण किया था. आइजी श्री डुंगडुंग की प्रेरणा से राजदेव ने जेल में रह कर मैट्रिक की परीक्षा दी और पास भी हुआ, लेकिन उसे अभी नौकरी नहीं मिली है. उस पर 14 मामले थे, जिससे वह रिहा हो चुका है.
माओवादियों ने गद्दार करार दिया
राजदेव ने बताया कि माओवादी उसे गद्दार घोषित कर मौत का फरमान जारी कर चुके हैं. अब जब वह जेल से बाहर निकला है, न तो उसका कोई ठिकाना है और ना ही पत्नी बच्चों का हालचाल जान पा रहा है. कभी मंदिरों में तो कभी रैन बसेरा में वह जिंदगी काट रहा है. एक ओर माओवादियों के खौफ तो दूसरी ओर पुलिस की वादा खिलाफी से वह तंग आ चुका है.
कौन है राजदेव
चतरा जिला के प्रतापपुर में दुंदु ग्राम निवासी हरि यादव का पुत्र कुंदन यादव जमीन विवाद से तंग आ कर 22 जुलाई 1995 को एमसीसी की सदस्यता ग्रहण की थी. वर्ष 2003 में उसने राजकुमारी से शादी की. संगठन में उसे एरिया कमांडर बनाया गया और वर्ष 2005 में वह उत्तर कोयल शंख कमेटी का सब जोनल कमांडर बना. उसकी पत्नी की मौत हो गयी.
वर्ष 2008 में उसने फुलमति देवी से शादी की. राजदेव पर एनएच-75 पर दुमुहान पुल के पास विस्फोट कर एक दारोगा समेत कुल आठ पुलिस कर्मियों को मारने का गंभीर आरोप है.
तत्कालीन आइजी रेजी डुंगडुंग के संपर्क में आकर प्रत्यार्पण नीति से प्रभावित हो कर उसने आत्मसमर्पण कर दिया. एक स्टेनगन के साथ राजदेव ने आत्म समर्पण किया था, तो उसके परिजनों को दो किस्तों में पांच लाख रुपये की राशि दी गयी थी.
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