गणेश चतुर्थी के व्रत से मिलती है व्याधियों से मुक्ति

रांची. मंगलवार को प्रभात खबर कार्यालय में ऑनलाइन ज्योतिष काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान ज्योतिषी अजय मिश्रा ने पाठकों के सवालों के जवाब दिये. उन्होंने दत्तक पुत्र के योग पर बताया कि किसी भी जातक या जातिक की कुंडली का पंचम भाव में बुध या शनि की राशि हो, तीसरा, छठा, […]
रांची. मंगलवार को प्रभात खबर कार्यालय में ऑनलाइन ज्योतिष काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान ज्योतिषी अजय मिश्रा ने पाठकों के सवालों के जवाब दिये. उन्होंने दत्तक पुत्र के योग पर बताया कि किसी भी जातक या जातिक की कुंडली का पंचम भाव में बुध या शनि की राशि हो, तीसरा, छठा, दसवां, बारहवां बुध-शनि से युक्त हो या दृष्टि हो तो दत्तक पुत्र का योग कहलाता है. संतान प्राप्ति धर्म करने से होती है.
बुध, शुक्र और चंद्रमा प्रति बंधक हो तो शिव का अभिषेक कराना चाहिए. अगर वृहस्पति बाधक हो तो मंत्र-तंत्र के औषधि प्रयोग करना चाहिए. शनि-राहु के बाधक होने पर कुल देवता, संतान गोपाल की अराधना करनी चाहिए. पंचम स्थान में जिस राशि में क्रूर ग्रह उनकी भी शांति कराना विशेष फलदायी होता है. समस्त प्रकार के ग्रहों की शांति समाधान के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत-अनुष्ठान कराने से सभी तरह के व्याधियों से निजात मिलती है.
कुंडली में शनि की महादशा,अंर्तदशा, मांगलिक योग, कालसर्प योग, गंभीर बीमारी, केस-मुकदमा, ऋण आदि से ग्रस्त, अशुभ समय से निजात पाने के लिए विध्नहर्ता गणपति के अनुष्ठान से समस्त व्याधियों से मुक्ति मिलती है. विद्यार्थियों को गणपति का पूजन विशेष लाभ देने वाला माना जाता है. संतान बाधा होने पर गणेश पूजन भाद्र माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी पर व्रत-अनुष्ठान अपने घर पर कराया जाना चाहिए.
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