हत्या का केस हटाने के लिए दबंगों ने छह परिवारों का हुक्का-पानी बंद कराया

Updated at : 22 Apr 2018 3:18 AM (IST)
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हत्या का केस हटाने के लिए दबंगों ने छह परिवारों का हुक्का-पानी बंद कराया

प्रेम प्रसंग में साढ़े चार माह पहले हुई थी युवक की हत्या युवक की हत्या करनेवाले आरोपियों व गांव के दबंगों ने केस उठाने का बनाया दबाव गांव से दूर चुआंड़ी का पानी पीने को मजबूर हैं परिवार लातेहार : प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या करनेवाले आरोपियों व दबंगों पर पीड़ित परिवार का हुक्का […]

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प्रेम प्रसंग में साढ़े चार माह पहले हुई थी युवक की हत्या

युवक की हत्या करनेवाले आरोपियों व गांव के दबंगों ने केस उठाने का बनाया दबाव
गांव से दूर चुआंड़ी का पानी पीने को मजबूर हैं परिवार
लातेहार : प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या करनेवाले आरोपियों व दबंगों पर पीड़ित परिवार का हुक्का पानी बंद कराने का एक मामला प्रकाश में आया है. मामला सदर थाना क्षेत्र के तुबेद गांव का है. यहां सात नवंबर 2017 को एक युवक को गांव की भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था. तुबेद गांव का नागेंद्र तुरी का पुत्र जितेंद्र तुरी गांव के ही एक उरांव जाति की लड़की से प्रेम करता था. दोनों घर से भाग गये थे. कुछ दिनों बाद गांव वालों को जब पता चला कि वे लातेहार आ कर एक होटल में ठहरे हुए हैं, तो गांव के कुछ दबंग आये और उन्हें जबरन तुबेद ले गये और जितेंद्र तुरी की पीट पीट कर हत्या कर दी. जितेंद्र के पिता नागेंद्र तुरी ने तुबेद गांव के 13 व्यक्तियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी लातेहार थाना में दर्ज करायी थी.
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ग्रामीणों ने एक पूर्व मुखिया के नेतृत्व में बैठक की और केस उठाने का दबाव मृतक के पिता नागेंद्र तुरी पर बनाया गया. जब पीड़ित परिवार ने केस नहीं उठाया तो दिसंबर महीने से गांव के सभी छह तुरी जाति परिवार पर प्रतिबंध लगाने का फरमान सुनाया गया. तब से इन छह परिवार के 40 सदस्यों को गांव के चापानल, आंगनबाड़ी एवं सामुदायिक भवन के उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां तक कि गांव की सड़कों पर चलने पर भी उन्हें अपमानित किया जा रहा है. पिछले पखवारे से उन्हें न तो महुआ चुनने तक नहीं दिया गया और न तो बीड़ी पत्ता तोड़ने दिया जा रहा है. दबंगों के फरमान से 40 सदस्यीय छह तुरी परिवार इलाका छोड़ने पर विवश हैं. इन्हें गांव से दूर स्थित चुआंड़ी का पानी पीना पड़ रहा है.
ग्रामीण विजेंद्र तुरी ने बताया कि मवेशियों को चराने के लिए दूसरा गांव ले जाना पड़ रहा है. यहां तक कि उनके बच्चे गांव के आंगनबाड़ी एवं स्कूलों में भी जाने से कतरा रहे हैं. पीड़ित परिवारों का कहना है कि इनके फरमान से उनका जीना दूभर हो गया है. वे लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गये हैं. जितेंद्र की मां उस घटना को याद करते हुए रो पड़ती हैं. वह कहती हैं कि छह माह से उन्हें खानाबदोश की जिंदगी जीना पड़ रहा है.
ये हैं जितेंद्र की हत्या के आरोपी : तुबेद गांव के सुरेंद्र उरांव, मंगलदेव उरावं, कार्तिक उरांव, वीरेंद्र उरांव, मनोज उरांव, सूबेदार उरांव, धनलाल उरांव, लक्ष्मण उरांव, लाला उरांव, चरवा उरांव, बलराम उरांव, सूबेदार उरांव (दो) तथा रामलाल उरांव को हत्या का नामजद आरोपी बनाया गया है.
कानून हाथ में लेनेवालों को बख्शा नहीं जायेगा: एसपी
पुलिस अधीक्षक प्रशांत आनंद का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. इसकी जांच करायेंगे. यदि जांच में मामला सत्य पाया गया तो आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी तथा हुक्का-पानी बंद करने एवं प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई करनेवाले ग्रामीणों पर अलग से मुकदमा दायर कराया जायेगा. प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत दो आरोपियों पर आरोप पत्र भी अदालत में समर्पित किया जा चुका है और शेष पर विधि सम्मत कार्रवाई जारी है.
मुखिया को नहीं है जानकारी : स्थानीय मुखिया मुनिया देवी का कहना है कि हत्या की जानकारी तो है परंतु पीड़ितों को प्रताड़ित करने की जानकारी उन्हें नहीं है.
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