15 वर्ष से बेकार हैं जंगलों के बांस

Published at :04 May 2014 5:16 AM (IST)
विज्ञापन
15 वर्ष से बेकार हैं जंगलों के बांस

कृष्णा गुप्ता गारू (लातेहार) : जंगलों में बहुतायत में बांस हैं. सरकार की नीतियों के कारण बांस का भारी नुकसान हो रहा है. स्थिति यह है कि जंगलों में 60 फीसदी बांस नष्ट हो चुका है. बांस की कटाई नहीं होने से सरकार को प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है. बांस […]

विज्ञापन

कृष्णा गुप्ता

गारू (लातेहार) : जंगलों में बहुतायत में बांस हैं. सरकार की नीतियों के कारण बांस का भारी नुकसान हो रहा है. स्थिति यह है कि जंगलों में 60 फीसदी बांस नष्ट हो चुका है. बांस की कटाई नहीं होने से सरकार को प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है. बांस काटने से लाखों मानव दिवस का सृजन होता था. अब कटाई नहीं हो रही है. ग्रामीण मजदूर रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

मजदूरों के लिए सुलभ रोजगार बंद हो गया है. आय के साधन बंद हो गये हंै. ग्रामीण मजदूर रोजगार के लिए परेशान हैं. व्यवसायी भी परेशान हैं. केंद्र सरकार ने 1985-86 में वन नीति पारित की थी. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय कैबिनेट सचिव टीएन शेषन थे. श्री शेषन ने नये वन अधिनियम को पारित कराया था.

अधिनियम के मुताबिक सभी कोर-बफर एरिया के जंगलों को आरक्षित वन क्षेत्र (रिजर्व फोरेस्ट) घोषित कर दिया गया. इस अधिनियम के अनुसार वर्ष 1999 से जंगल की कटाई 15 वर्ष से पूरी तरह बंद हो गया. जंगलों के बीच रहने वाले लोगों के लिए यह वन अधिनियम नुकसानदेह साबित हुआ. वर्षो से मिलने वाला परंपरागत रोजगार (बांस, लकड़ी कटाई) बंद हो गया. लोगों के मुंह का निवाला छिन गया.

बांस की कटाई बंद होने से बांस बरबाद होने लगे. जंगल भी उजड़ने लगा. कटाई नहीं होने के कारण बांस सूख कर गिरने लगे. जंगलों में आग लगने से बांस का सफाया होता जा रहा है. वन अधिनियम के अनुसार बांस को पेड़ की श्रेणी में परिभाषित किया गया. बांस घास की श्रेणी की एक प्रजाति है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बांस की जितनी छंटनी की जाये, उसका संवर्धन उतना ही अधिक होता है. आज स्थिति व्याघ्र परियोजना या रिजर्व फोरेस्ट (कोर व बफर) की ऐसी है कि बांसों पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.

झारखंड के लातेहार, पलामू, चतरा, हजारीबाग, गुमला, लोहरदगा आदि जिले में हरा सोना कहा जाने वाला बांस के वजूद पर प्रश्न चिह्न् लग गया है. उक्त जिले में 15 वर्ष से बांस कटाई नहीं हो रही है. इससे बांस के अलावा राजस्व की क्षति हो रही है. वर्ष 2002-03 में राज्य के पहले वन व पर्यावरण मंत्री यमुना सिंह ने बांस कटाई हेतु सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) में याचिका दायर की थी. मगर न्यायालय ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था. यदि हालात नहीं बदले गये, तो जंगलों से बांस गायब हो जाने की आशंका है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola