चाहत तो बड़ी थी, मगर हसरत ही रह गयी

Published at :29 Apr 2014 5:27 AM (IST)
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चाहत तो बड़ी थी, मगर हसरत ही रह गयी

गोपी कुंवर लोहरदगा : 16वें लोकसभा चुनाव में नौकरशाहों ने राजनीति में पैठ बनाने में कसर नहीं छोड़ी. नौकरशाही छोड़ कर सांसद बनने की चाहत में पंजाब कैडर के एक डीआइजी ने वीआरएस लेकर लोहरदगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए काफी मशक्कत की. नगरी- नगरी, द्वारे-द्वारे घूमे, नमो-नमो का जाप किया. इसके पूर्व […]

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गोपी कुंवर

लोहरदगा : 16वें लोकसभा चुनाव में नौकरशाहों ने राजनीति में पैठ बनाने में कसर नहीं छोड़ी. नौकरशाही छोड़ कर सांसद बनने की चाहत में पंजाब कैडर के एक डीआइजी ने वीआरएस लेकर लोहरदगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए काफी मशक्कत की. नगरी- नगरी, द्वारे-द्वारे घूमे, नमो-नमो का जाप किया. इसके पूर्व डीआइजी साहब हाथ वाली पार्टी से टिकट के लिए जुगत में थे.

चूंकि खानदानी विरासत में भी यही पार्टी रही थी. तर्क था कि पूरा परिवार पार्टी के प्रति समर्पित रहा है. स्वयं भी पूर्व प्रधानमंत्री के चिकित्सक रह चुके थे. लेकिन पार्टी के प्रदेश मुखिया जब खुद टिकट के लिए दिल्ली दौड़ गये, तो उन्हें एहसास हुआ कि गलत जगह फंस गये हैं. फिर फूल वाली पार्टी से टिकट की जुगाड़ में लग गये.

चूंकि धर्मपत्नी सूबे की मंत्री भी हैं, तो लोगों ने उनसे पूछा कि विरोधी पार्टी के टिकट से वे चुनाव लड़ेंगे, तो आप किसका साथ देंगे. धर्मपत्नी ने कहा, पति की बजाय पार्टी को अहमियत दूंगी. बयान चर्चा में रहा और डीआइजी साहब वातानुकूलित कमरे से निकल कर लोहरदगा, गुमला, सिसई, बिशुनपुर, मांडर के शोषित, बदहाल, अभावग्रस्त जनता से मिलने निकल गये. उनकी स्थिति को देख कर उन्हें काफी तरस भी आयी. कहा कि, आजादी के बाद से अब तक सचमुच में इस क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है. जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. एक बार मौका दीजिये. मैं तसवीर और तकदीर दोनों बदल दूंगा. टिकट के लिए सौ प्रतिशत आश्वस्त थे.

सारी तैयारी हो चुकी थी. कई लोगों को भी साथ ले लिये थे. राज्य के राजनीतिक दिग्गजों ने मन ही मन निर्णय लिया कि अपनी रक्षा पहले होनी चाहिए. हुआ वही, जो राजनीति में शुरू से होते आया है. बात नहीं बनी, तो फिर से वापस जाकर वीआरएस का आवेदन वापस लिया और फिर डीआइजी की कुरसी संभाल ली. डीआइजी ने खुद को तसल्ली दी. कहा, पार्टी ने मेरे नाम पर विचार किया, यह भी मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है. इतना कह कर फिर से डीआइजी की कुरसी पकड़ ली.

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