राम कथा के पांचवें दिन शबरी भक्ति, भरत विलाप व सुग्रीव मिलन का वर्णन

Updated at : 16 Mar 2026 8:30 PM (IST)
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राम कथा के पांचवें दिन शबरी भक्ति, भरत विलाप व सुग्रीव मिलन का वर्णन

राम आचरण, मर्यादा और कर्म की पहचान: आचार्य पंडित रामकरण

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राम आचरण, मर्यादा और कर्म की पहचान: आचार्य पंडित रामकरण झुमरीतिलैया. सात दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के पांचवें दिन कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. कथा के दौरान शबरी भक्ति, भरत विलाप और सुग्रीव मिलन के मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. कथा के दौरान आचार्य पंडित रामकरण सहल ने कहा कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने योग्य आचरण और कर्म का प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम चाहते, तो रावण का वध बैठे-बैठे ही कर सकते थे, लेकिन केवट, शबरी और अहिल्या जैसे भक्तों के उद्धार के लिए उन्हें वन यात्रा करनी पड़ी. भगवान का अवतार केवल राक्षसों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि मनुष्यों के कल्याण के लिए भी होता है. उन्होंने बताया कि ब्रह्मा ने अपने हाथों से अहिल्या की रचना की थी. इसी प्रकार मंदोदरी, तारा, द्रौपदी और कुंती को भी पंचकन्या के रूप में स्मरण किया जाता है. इन सभी का जीवन असाधारण रहा और आज भी इन्हें आदर के साथ याद किया जाता है. कथावाचक ने राम और सीता विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु वशिष्ठ को पूर्व से ही ज्ञात था कि सीता के लिए राम ही योग्य वर हैं, इसलिए उन्होंने स्वयंवर में भाग लेने का निर्णय लिया था. शिव धनुष उठाते ही जनक ने राम से विवाह का आग्रह किया, लेकिन राम ने कहा कि पिता की अनुमति के बिना विवाह संभव नहीं है. इसके बाद जनक ने दूत के माध्यम से अयोध्या में लग्न पत्रिका भेजी और राजा दशरथ पूरे दलबल के साथ मिथिला पहुंचे, जहां चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ. व्यास पीठ से आचार्य रामकरण ने जय सियाराम सत्संग समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि इतने बड़े आयोजन के माध्यम से हजारों लोगों को राम के चरित्र को सुनने और समझने का अवसर मिल रहा है, यह साधारण बात नहीं है और यह सब प्रभु राम की कृपा से ही संभव हो रहा है. कथा के दौरान पुजारी पंडित अरविंद पांडेय और विकास पांडेय ने पूजा-अर्चना करायी. यजमान के रूप में संजय मोदी, बेबी देवी और पुनीत प्रभा शामिल थे. कथा के बाद आचार्य रामकरण ने व्यास पीठ से उतरते ही विनोद बजाज को सम्मानित करते हुए कहा कि जो गौ माता की सेवा करता है वह केवल सेवक नहीं, बल्कि श्रेष्ठ ब्राह्मण के समान होता है. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत व्यास पीठ की पूजा एवं माल्यार्पण के साथ हुई. अरुण मोदी ने कथावाचक आचार्य पंडित रामकरण सहल का माल्यार्पण कर स्वागत किया. कथा के बीच-बीच में भजन संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें भजन गायक अमरनाथ मिश्रा, प्रभुनाथ पांडेय और बजरंगी पांडेय ने भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे पंडाल को भक्ति रस में सराबोर कर दिया. आरती के बाद प्रसाद वितरण का दायित्व प्रदीप केडिया ने संभाला. उनके साथ राजेंद्र वर्णवाल, उमेश मोदी, राजेंद्र सिंह सहित अन्य सहयोगियों ने व्यवस्था संभाली. मौके पर शालिनी गुप्ता, सुषमा देवी, अरविंद चौधरी, चंद्रशेखर जोशी, सूर्यदेव वर्णवाल , दीपक कुमार गुप्ता, आशा वर्णवाल, रेखा जायसवाल, सुजाता जोशी, वर्षा देवी, सीमा देवी, अर्जुन मोदी, चंद्रशेखर सोनकर, बसंत अग्रवाल, कुसुम अग्रवाल, शालू चौधरी, संजय ठोलिया, मनोज पांडेय, मनोज जोशी, दिनेश मिश्रा सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे.

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