कड़ाके की ठंड व घना कोहरा से फसलों को बचाना चुनौती

Updated at : 05 Jan 2026 9:30 PM (IST)
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कड़ाके की ठंड व घना कोहरा से फसलों को बचाना चुनौती

बागवानी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है मौसम

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: बागवानी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है मौसम राजेश सिंह जयनगर. जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड, घना कोहरा तथा ओस ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. पशु-पक्षी भी परेशान हैं. वहीं फसलों पर भी कई प्रकार का खतरा मंडरा रहा है. कड़ाके की ठंड व घना कोहरा से फसलों को बचाना चुनौती बन गयी है. इस मौसम का प्रभाव सब्जियों तथा बागवानी की फसलों पर पड़ने लगा है. सुबह देर तक कोहरा छाया रहने से खेतों में लगी फसलों को सूर्य का प्रकाश कम मिलता है, जिससे फसलों की बढ़ने की क्षमता धीमी पड़ जाती है. वहीं पत्तियों पर लंबे समय तक ओस जमा रहने से फफूंद जनित रोग, झुलसा, सड़न और पाले का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. आलू, टमाटर, मटर, गोभी, फूलगोभी, सरसों और अन्य रबी एवं सब्जी फसलें इस मौसम में विशेष रूप से प्रभावित होती हैं. हल्का सा तापमान गिरने पर भी भारी नुकसान की आशंका रहती है. कैसे करें फसलों की रक्षा, सुरक्षा कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के विषय वस्तु विशेषज्ञ देवरूप घोष ने इस संबंध में बताया कि किसान सुबह के समय हल्की सिंचाई अवश्य करें, जिससे पत्तियों पर जमी ओस धुल जाये और पौधों को ठंड से कुछ राहत मिले. साथ ही खेतों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था बनाये रखें, ताकि अतिरिक्त नमी जमा न हो और रोग फैलने की संभावना कम रहे. कोहरे वाले दिनों में कीटनाशक या फफूंद नाशक का छिड़काव तभी करना चाहिए, जब मौसम साफ हो, क्योंकि अधिक नमी में किया गया छिड़काव प्रभावी नहीं होता और फसल को अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि पाले से बचाव के लिए किसान पुआल, सूखी घास या फसल अवशेषों से पौधों को ढक सकते हैं. वहीं सब्ज़ी उत्पादक किसान अस्थायी पॉलिथीन कवर, लो-टनल या प्लास्टिक शीट का उपयोग कर फसलों को ठंडी हवा और ओस से बचा सकते हैं. इसके अतिरिक्त, रात के समय मेड़ों पर धुआं करने से आसपास के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होती है, जिससे पाले का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि केवल फसल ही नहीं, बल्कि पशुपालन भी इस कड़ाके की ठंड से प्रभावित होता है, इसलिए पशुओं के बाड़े को ठंडी हवा से बचाकर रखें. उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि वे मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नज़र रखें और कृषि विभाग द्वारा जारी चेतावनी व सलाहों का समय पर पालन करें.

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