पापमोचनी एकादशी क्यों मनाई जाती है? जानें पौराणिक कथा

Updated at : 11 Mar 2026 1:48 PM (IST)
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Papmochani Ekadashi

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (एआई द्वारा निर्मित तस्वीर)

Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक विशेष पर्व है. आइए, एक पौराणिक कथा के माध्यम से जानते हैं कि इस व्रत को करने के पीछे क्या रहस्य छिपा है. साथ ही जानेंगे कि साल 2026 में यह व्रत कब किया जाएगा.

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Papmochani Ekadashi 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है. इसे पापों का नाश करने वाली एकादशी माना जाता है. इस दिन भक्त विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और व्रत रखते हैं. कहा जाता है कि इस व्रत को करने से जीवन में जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है. साथ ही मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले एक ऋषि हुआ करते थे. वे वन में भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रहे थे. उनकी कठोर तपस्या को देखकर देवराज इंद्र भयभीत हो गए. उन्होंने ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नाम की एक अप्सरा को उनके पास भेजा.

मंजुघोषा की सुंदरता देखकर ऋषि मोहित हो गए और उनकी तपस्या भंग हो गई. इसके बाद वे उस अप्सरा के साथ अपना जीवन बिताने लगे. दोनों कई वर्षों तक साथ रहे. बाद में मंजुघोषा ने स्वर्ग लौटने की इच्छा जताई. यह सुनकर ऋषि बेहद क्रोधित हो गए. उन्हें एहसास हुआ कि छल से उनकी तपस्या भंग करवाई गई है. क्रोध में आकर उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचिनी बनने का श्राप दे दिया.

इसके बाद मंजुघोषा ने ऋषि से क्षमा मांगी. तब ऋषि ने उसे प्रायश्चित के रूप में पापमोचनी एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया. मंजुघोषा ने ऋषि की बात मानकर यह व्रत किया. स्वयं ऋषि ने भी अपनी तपस्या के नष्ट होने के प्रायश्चित के लिए यह व्रत किया. इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः अप्सरा बन गई. साथ ही ऋषि के भी सभी पाप नष्ट हो गए.

एकादशी व्रत का महत्व और लाभ

मानसिक शांति: धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से मन के विकार जैसे क्रोध, मोह और लोभ कम होते हैं और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.

पुण्य की प्राप्ति: ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का फल कई हजार वर्षों की तपस्या के बराबर होता है.

आत्म-शुद्धि: यह व्रत आत्म-चिंतन करने, आत्म-शुद्धि और प्रायश्चित का अवसर प्रदान करता है.

भगवान विष्णु की कृपा: यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

पापमोचनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ: 14 मार्च 2026, शनिवार सुबह 08:15 बजे से
  • एकादशी तिथि का समापन: 15 मार्च 2026, रविवार सुबह 09:16 बजे तक
  • व्रत की तिथि: 15 मार्च 2026
  • पारण का समय: 16 मार्च 2026, सोमवार सुबह 06:46 बजे से 09:11 बजे तक

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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