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गुरुवाणी व शबद-कीर्तन से संगत निहाल

Updated at : 13 Apr 2025 9:44 PM (IST)
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गुरुवाणी व शबद-कीर्तन से संगत निहाल

डॉक्टर गली स्थित गुरुद्वारा कालगिधर सिंह सभा और गुरुद्वारा गुरु सिंह खलासा स्थापना दिवस व बैसाखी पर्व धूमधाम से मना.

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झुमरीतिलैया. डॉक्टर गली स्थित गुरुद्वारा कालगिधर सिंह सभा और गुरुद्वारा गुरु सिंह खलासा स्थापना दिवस व बैसाखी पर्व धूमधाम से मना. गुरुद्वारा में आस्था, भक्ति, भजन और सेवा की अद्भुत मिसाल देखने को मिली. डॉ गली स्थित गुरुद्वारा कालगिधर सिंह सभा में दो दिन से चल रहे अखंड पाठ का रविवार को विधिवत समापन हुआ. पाठ हरजिंदर सिंह भल्ला के द्वारा आरंभ कराया गया था. समापन उपरांत विशेष दीवान सजाया गया, जिसमें भाई निरंजन सिंह ने गुरुवाणी, शबद-कीर्तन और प्रेरणादायक वचनों से संगत को निहाल किया. उन्होंने कहा कि बैसाखी पर्व पर फसल की कटाई होती है. यही वह दिन है जब गुरु गोविंद सिंह जी ने अमृत पान करवा कर खालसा की स्थापना की थी. उन्होंने कहा कि खालसा मेरो रूप खास, खालसे में हूं मैं निवास. कार्यक्रम के दौरान जो बोले सो निहाल के नारों से वातावरण गुंजायमान रहा. गुरुद्वारा के प्रधान बलवंत सिंह लांबा ने ऑनलाइन जुड़ी संगत को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम के अंत में अटूट लंगर का आयोजन हुआ. इस अवसर पर उपाध्यक्ष हरजिंदर सिंह भल्ला, सचिव संजू लांबा, कोषाध्यक्ष अवतार सिंह के साथ-साथ पुष्पेंद्र सिंह, कुलबीर कालरा, बिल्लू सिंह ओबेरॉय, बूटी सिंह, विनेश छाबड़ा, करण अजवानी, बाब्लू बग्गा, गोल्डी भाटिया, सनी बग्गा, मनमोहन सलूजा, हरजीत सिंह सलूजा, मंजीत कौर, अमन कौर, कुलदीप कौर, त्रिलोचन कौर, स्वीट कौर सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे.

पटना से आये रागी जत्थे ने बांधा भक्ति का समा

वहीं दूसरी ओर शहर के ही गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में रविवार सुबह 11 बजे से विशेष दीवान का आयोजन हुआ. इस अवसर पर पटना से आये तख्त हरमंदिर साहिब के प्रसिद्ध रागी जत्था सरदार हरभजन सिंह ने अपने समूह के साथ गुरु महाराज की महिमा का दो घंटे तक भावपूर्ण गायन किया. दीवान हॉल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, और शबद वाणी के बीच बोले सो निहाल के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा. ज्ञानी राजा सिंह ने भी भक्ति रस से सराबोर शबद गायन कर संगत को आनंदित किया. सभा के सचिव गुरभेज सिंह शम्मी ने बताया कि 1699 में इसी दिन दशम गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. उन्होंने पांच प्यारों को अमृत पान कराकर उन्हें खालसा बनाया और फिर स्वयं भी उनके हाथों से अमृत पान कर अपने को खालसा सजाया. यह गुरु और चेले के बीच का अद्भुत, अनुपम और अनूठा संबंध है. दीवान का समापन दोपहर तीन बजे हुआ, जिसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं को गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया. गुरुद्वारा परिसर को रंग-बिरंगी सजावटों से सजाया गया था. सभा के अंत में गुरभेज सिंह शम्मी ने सभी को बैसाखी और खालसा स्थापना दिवस की बधाई देते हुए संगत का आभार व्यक्त किया. दोनों ही गुरुद्वारों में कार्यक्रमों की भव्यता और श्रद्धालुओं की सेवा भावना ने साबित कर दिया कि गुरु की राह पर चलने वाले सिख धर्म के अनुयायी आज भी सेवा, त्याग और भाईचारे की भावना में विश्वास रखते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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