मोमिन वह है जिसके हाथ व जबान से दूसरे सुरक्षित रहें : अरमान खान

इस्लाम ने शांति और सहनशीलता पर विशेष जोर दिया है. नबी करीम (स) ने फरमाया है कि मोमिन वह है जिसके हाथ और जबान से दूसरे सुरक्षित रहें.
जयनगर. इस्लाम ने शांति और सहनशीलता पर विशेष जोर दिया है. नबी करीम (स) ने फरमाया है कि मोमिन वह है जिसके हाथ और जबान से दूसरे सुरक्षित रहें. उक्त बातें कांग्रेस यूथ के जिला उपाध्यक्ष अरमान खान ने कही है. उन्होंने कहा कि इस्लाम पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और रिश्तेदारी का ख्याल रखने पर जोर देता है. फरमाया गया कि वह व्यक्ति मोमिन नहीं जो स्वयं पेट भर खाये और उसका पड़ोसी भूखा रहे. (बुखारी) ये शिक्षाएं इस्लाम की दयालुता और समावेशिता से परिचित कराती है. रमजान केवल आत्मिक शुद्धता ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन की शिक्षा भी देता है. इस्लाम फिजूलखर्ची और पर्यावरण के दुरुपयोग को मना करता है. कुरआन में निस्संदेह अल्लाह फिजूलखर्चों को पसंद नहीं करता. रमजान-उल-मुबारक इस्लाम का वह उज्ज्वल चेहरा प्रस्तुत करता है, जो पूरी मानवता को भाईचारे, न्याय और दया का निमंत्रण देता है. यह महीना संदेश देता है कि इस्लाम प्रेम, सहिष्णुता और सार्वजनिक कल्याण का धर्म है. यदि रमजान की शिक्षाओं को समझा जाये, तो यह पूरी मानवता के लिए शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है.
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