विभाग पहले नियुक्ति सुनिश्चित करें : संघ

झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने शिक्षा सचिव के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वार्षिक परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन की जवाबदेही उसके सभी हितधारकों की समान रूप से है
कोडरमा. झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने शिक्षा सचिव के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वार्षिक परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन की जवाबदेही उसके सभी हितधारकों की समान रूप से है. इसको समझते हुए शिक्षक निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी कर रहे हैं. वार्षिक परीक्षाओं को लेकर सरकार की चिंताओं को हम सभी गंभीरता से लेते हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा सचिव का यह कथन कि “खराब रिजल्ट पर हेडमास्टर नपेंगे और अच्छा होने पर प्रधानाचार्य सम्मानित होंगे” स्वागत योग्य माना जाता, परंतु विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि स्थापना एवं उत्क्रमण से लेकर आज तक इन पदों पर नियुक्ति ही नहीं की गई है और वर्तमान विभागीय नीति ऐसी बना दी गई है कि कम से कम अगले एक दशक तक विद्यालय प्रधान पर नियुक्ति भी नहीं हो पायेगी. ऐसे में इनको दंडित अथवा सम्मानित करने के लिए पहले विभाग को इन पदों पर नियुक्ति करनी चाहिए, तभी यह तार्किक एवं नैतिक रूप से उचित माना जायेगा. क्योंकि दशकों से प्रभारी व्यवस्था के भरोसे ही विद्यालयों का संचालन कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति, विद्यालयों में नियमित प्राचार्य की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित करती है, परंतु यदि विभाग की नजर में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नियमित विद्यालय प्रधान की कोई भूमिका या महत्ता नहीं है, तो इसकी औपचारिक घोषणा भी कर देनी चाहिए तथा इन पदों को सिर्फ नियमावली में शोभा बढ़ाने के लिए नहीं रखा जाना चाहिए. संघ ने आरोप लगाया कि नियमावली में प्रावधान के बावजूद विभाग ने प्लस टू शिक्षकों के प्रोन्नति के सभी अवसरों को बिना किसी कारण एवं उद्देश्य के स्थायी रूप से समाप्त कर दिया है. साथ ही विभागीय सौतेलापन एवं उदासीनता के कारण प्रभारी नियुक्ति में हो रहे मनमानेपन की वजह से अधिकांश विद्यालयों में प्लस टू शिक्षक कनीय संवर्ग के अधीन कार्य करने के लिए विवश किए जा रहे हैं. ऐसे में विभाग द्वारा उनके मनोबल को चौतरफा क्षीण किया जाना राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अनुकूल कदापि नहीं है. इस संबंध में प्रांतीय संरक्षक सुनील कुमार ने कहा कि यदि विभाग सचमुच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहाल करना एवं शिक्षकों का सम्मान करना चाहती है तो इसे महज एक दिवसीय कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय प्लस टू विद्यालय नियमावली को अक्षरशः लागू करे, प्राचार्य पद सृजित कर नियमित नियुक्ति करे तथा शिक्षकों के प्रोन्नति के अवसर को बरकरार रखे. कोडरमा प्लस टू शिक्षक संघ के अध्यक्ष धनंजय उपाध्याय ने बताया की पूरे कोडरमा जिला में एक भी प्लस टू या उच्च विद्यालय नहीं है, जहां पर स्थायी प्राचार्य या प्रधानाध्यापक अभी नियुक्त है. जिले के सभी विद्यालय प्रभारी के भरोसे चल रहा है, एक तरफ विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत है कि जिस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुचारू रूप से विद्यालय में चलाने के लिए जब -जब प्राचार्य नियुक्ति की बात आती है तब यह नियुक्ति विभागीय पेंच में फंस जाती हैं.
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