कांड के अनुसंधान में विज्ञान व तकनीक का प्रयोग महत्वपूर्ण

Updated at : 11 May 2017 7:37 AM (IST)
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कांड के अनुसंधान में विज्ञान व तकनीक का प्रयोग महत्वपूर्ण

डीआइजी भीमसेन टूटी व एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने संयुक्त रूप से झंडोत्तोलन कर व सफेद कबूतर व बैलून उड़ा कर किया चंदवारा : प्रखंड मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में बुधवार को सात दिवसीय क्षेत्रीय पुलिस ड्यूटी मीट व शूटिंग प्रतियोगिता (उत्तरी छोटानागपुर, हजारीबाग) वर्ष 2017 शुरू हुआ. इसकी शुरुआत डीआइजी भीमसेन टूटी व एसपी […]

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डीआइजी भीमसेन टूटी व एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने संयुक्त रूप से झंडोत्तोलन कर व सफेद कबूतर व बैलून उड़ा कर किया
चंदवारा : प्रखंड मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में बुधवार को सात दिवसीय क्षेत्रीय पुलिस ड्यूटी मीट व शूटिंग प्रतियोगिता (उत्तरी छोटानागपुर, हजारीबाग) वर्ष 2017 शुरू हुआ. इसकी शुरुआत डीआइजी भीमसेन टूटी व एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने संयुक्त रूप से झंडोत्तोलन कर व सफेद कबूतर व बैलून उड़ा कर किया. साथ ही पुलिस लाइन हॉल में आयोजित कार्यक्रम का उदघाटन अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया.
मौके पर मुख्य अतिथि डीआइजी भीमसेन टूटी ने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कांड के अनुसंधान में विज्ञान व तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण होता है. इससे चाहे कांड के गवाह मुकर जाये, लेकिन यदि अनुसंधान वैज्ञानिक ढंग से किया जाये, तो केस का पटाक्षेप आसानी व वास्तविक तौर पर किया जा सकता है. कहा कि पुलिस के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां है.
इसमें कांडों का अनुसंधान सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेवारी है. पुलिस मीट महत्वपूर्ण इसलिए है कि कई जिलों से प्रतिभागी भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक लाते हैं. मैंने भी इस तरह का प्रशिक्षण लेकर कांडों का पटापेक्ष कर पुरस्कार जीते हैं. इस तरह का मीट पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ाता है. उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान की सफलता के एक उदाहरण की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जम्मू पदस्थापना के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान के सहारे पांच हत्या व 55 लाख की लूट के मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी की. सफलता उन्हें 64 दिनों बाद मिली थी.
मामले में फॉरेंसिक जांच के आधार पर 11 महीने के बाद मध्यप्रदेश से घटना में शामिल 12 अपराधियों को पकड़ा गया था. मजबूत साक्ष्य की बदौलत ही 2015 में सेशन कोर्ट में दो लोगों को सजा-ए-मौत दी गयी. वहीं अपराधियों द्वारा बोतल, तंबाकू, सिगरेट व डीएनए टेस्ट से दूसरे कांड का अभियुक्त भी पकड़ा गया था. इसलिए वैज्ञानिक अनुसंधान काफी महत्वपूर्ण है. एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने कहा कि पुलिस की रीढ़ को सशक्त किया जा सके, इसलिए पुलिस मीट व शूटिंग प्रतियोगिता काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने इसका लाभ उठाने की अपील की. संचालन डीएसपी कर्मपाल उरांव ने किया.
वैज्ञानिक दल ने दी कई जानकारियां
कार्यक्रम में एएसआइ, एसआइ व इंस्पेक्टर को वैज्ञानिक पहलुओं से जांच के संबंध में जानकारी देने के लिए अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय से विशेष टीम पहुंची हैं.
टीम में शामिल राजकीय अनुलग्नक नीरज सहाय, सहायक निदेशक राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रांची के ज्वाला कुमार नंद, वैज्ञानिक सहायक राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला रांची के अनिल कुमार, अप.अनु.वि. रांची के टीएन शर्मा, अरुण कुमार, नवीन कुमार, लाला दास, स्वान दस्ता रांची के सुखदेव कच्छप, कंप्यूटर साक्षरता विषय प्रतिनियुक्त डीसीबी हजारीबाग के फूल चंद नारायण यादव आदि शामिल हैं. उन्होंने उत्तरी छोटानागपुर के कोडरमा, चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह से पहुंचे पुलिस पदाधिकारियों को कांड के अनुसंधान द्वारा किस तरह वैज्ञानिक मदद ली जा सकती है, इसकी विस्तृत जानकारी दी.
पदाधिकारियों को फिंगर प्रिंट की भी जानकारी दी जायेगी. नीरज सहाय ने कहा कि अपराधी हमेशा कुछ न कुछ साक्ष्य छोड़ जाते है, जैसे खैनी, तंबाकू, शराब की बोतल, सिगरेट व अन्य. इससे भी काफी मदद ली जा सकती है. प्रशिक्षण के दौरान पुलिस पदाधिकारियों की परीक्षा भी ली जायेगी. मौके पर एसडीपीओ चंदेश्वर प्रसाद, कोडरमा थाना प्रभारी आनंद मोहन सह तिलैया थाना प्रभारी कामेश्वर ठाकुर, इंस्पेक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह, राजवल्लभ पासवान, जनार्दन गुड़वा, पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखदेव शर्मा, कोषाध्यक्ष पंकज कुमार, मेजर अनिष कुमार, चंदवारा थाना प्रभारी विनोद कुमार समेत अन्य पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे.
ढाई वर्ष में पुलिस को मिली बड़ी सफलता
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में डीआइजी भीमसेन टूटी ने कहा कि झारखंड राज्य पुलिस को नक्सलवाद के खात्मे को लेकर ढाई वर्षों में अतुलनीय सफलता हासिल हुई है. नक्सल प्रभावित 13 कोट एरिया राज्य में चिह्नित किए गये हैं, जिसमें कोडरमा, गिरिडीह, चतरा व अन्य शामिल हैं.
कहा कि विकास व सुरक्षा पुलिस का नैतिक दायित्व है. सुरक्षा के अभाव में कहीं विकास का कार्य ठप न हो, इसका ध्यान रखा जायेगा. उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो नक्सलवाद से प्रभावित हैं. इन इलाकों में भी पुलिस की सुरक्षा विकास के लिए सदैव तत्पर है, ताकि गांव-गांव में विकास की किरण जलें.
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