सख्ती के बावजूद चल रहा शराब का धंधा

Updated at : 13 Jul 2016 8:01 AM (IST)
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सख्ती के बावजूद चल रहा शराब का धंधा

कोडरमा : जिले में अवैध महुआ शराब की चुलाई व बिक्री का धंधा उत्पाद विभाग व पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद नहीं थम रहा है. पिछले तीन माह से उत्पाद विभाग अवैध महुआ शराब के धंधे को समाप्त करने के लिए लगातार छापामारी अभियान चला रहा है. लेकिन हकीकत यह है कि इतनी सख्ती […]

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कोडरमा : जिले में अवैध महुआ शराब की चुलाई व बिक्री का धंधा उत्पाद विभाग व पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद नहीं थम रहा है. पिछले तीन माह से उत्पाद विभाग अवैध महुआ शराब के धंधे को समाप्त करने के लिए लगातार छापामारी अभियान चला रहा है. लेकिन हकीकत यह है कि इतनी सख्ती के बावजूद कई इलाकों में यह धंधा अभी भी चल रहा है. खासकर जिले के सुदूरवर्ती जंगली क्षेत्रों में महुआ शराब बनाने का धंधा वर्षों से संचालित हो रहा है.
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले ढाई माह में अवैध शराब के धंधे को लेकर 100 मामले दर्ज किये गये हैं, इन मामलों में 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया व व 15 लोगों से कुल एक लाख, 97 हजार, 650 रुपये जुर्माना वसूल कर छोड़ा गया. इन दर्ज मामलों में 55 नामजद आरोपी फरार हैं, जबकि 14 अज्ञात आरोपी भी गिरफ्त से दूर हैं.
यही नहीं अगर उत्पाद विभाग के आंकड़े देखें, तो महुआ शराब के धंधे को बंद करने के लिए बड़े स्तर पर चले अभियान में हजारों क्विंटल जावा महुआ नष्ट किया गया. अप्रैल से जून माह के अब तक चले छापामारी अभियान में जहां 1230.500 लीटर चुलाई महुआ शराब जब्त किया गया, वहीं करीब 9570 किलो जावा महुआ को बरामद कर नष्ट किया गया.
साथ ही विभाग ने छापामारी अभियान में कुल 69 भट्टियों को ध्वस्त किया. यह तो महुआ शराब को लेकर हुई कार्रवाई है. अगर अन्य शराब के अवैध धंधे को लेकर हुई कार्रवाई की बात करें, तो विभाग ने इन ढ़ाई माह में 110 लीटर देसी शराब, 275.030 लीटर विदेशी शराब व 141.550 लीटर बीयर, 400 मिली लीटर मसालेदार देसी शराब जब्त किया. विभागीय पदाधिकारी के अनुसार अवैध महुआ शराब का धंधा अधिकतर जंगली क्षेत्रों में चलता है. इनमें प्रमुख रूप से खेरेड़वा, रोहनियाटांड़, गझंडी, जरगा, फुलवरिया, चुटियारो, डोमचांच के ढाब, मरकच्चो व नवलशाही, चंदवारा, जयनगर व सतगावां के कुछ क्षेत्र के साथ ही अन्य जगहों पर महुआ शराब चुलाई का धंधा चलता है.
उत्पाद विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इन दिनों शराब की खपत भी बढ़ गयी है. पड़ोसी राज्य बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र कोडरमा होने के कारण यहां लोग अक्सर बिहार से आ रहे हैं. साथ ही बिहार में शराब की तस्करी भी बढ़ी है.
हालांकि विभागीय पदाधिकारी तस्करी के मामले से इनकार करते हैं. अगर आंकड़ों की बात करें, तो अप्रैल से जून 2015 तक में देसी शराब की खपत जहां 43913.28 एलपी (लंडन प्रूफ लीटर) लीटर था, वहीं अप्रैल से जून 2016 में देसी शराब की खपत बढ़ कर 52515.21 एलपी लीटर हो गया है. यहीं नहीं विदेशी शराब की मांग में काफी इजाफा हुआ है.
वर्ष 2015 के शुरुआती तीन माह में जहां 67444.27 एलपी लीटर विदेशी शराब की खपत हुई थी, वहीं इस बार जून तक में 89261.23 एलपी लीटर विदेशी शराब की खपत हुई है. हालांकि इस बार गरमी अधिक समय तक नहीं पड़ने के कारण बीयर की बिक्री में कमी आयी है. पिछले वर्ष शुरुआती माह में बीयर की खपत जहां तीन लाख, 19 हजार, 765.60 ब्लक लीटर था, वहीं इस साल के तीन माह में बीयर की खपत दो लाख, 74 हजार, 324.56 ब्लक लीटर है. इस वर्ष अप्रैल से जून तक में मसालेदार शराब की खपत 3152.14 एलपी लीटर है. ज्ञात हो कि जिले में कुल 46 शराब दुकानें हैं लाइसेंसी है. इनमें 16 देसी, 16 विदेशी व 14 कंपोजिट शराब की दुकाने हैं.
कर्मियों की कमी से जूझ रहा है उत्पाद विभाग
उत्पाद विभाग लगातार छापामारी अभियान तो चला रहा है, पर विभाग कर्मियों व वाहन की कमी से जूझ रहा है.विभाग के पास मात्र एक वाहन है. जिस पर अधीक्षक चलते हैं, वहीं इस वाहन को छापामारी के वक्त भी उपयोग में लाया जाता है. विभाग में प्रभारी उत्पाद अधीक्षक कमल नयन सिन्हा के अलावा दो एसआइ व अन्य कार्यरत हैं. बताया जाता है कि विभाग में सिपाही के दस पद सृजित हैं, जबकि कार्यरत मात्र तीन है. वहीं जमादार के दो स्वीकृत पद के विरुद्व एक भी कार्यरत नहीं है. इसके अलावा एसआइ के दो स्वीकृत पद पर दो एसआइ हैं.
क्लर्क के दो स्वीकृत पद के विरुद्ध एक कार्यरत है. विभाग के पास अपना कोई चालक नहीं है. एक चालक को प्रतिदिन के मानदेय पर रखा गया है. वाहन को लेकर विभाग के पदाधिकारी ने कई बार मुख्यालय को पत्र लिखा है, पर कोई समाधान नहीं हुआ.
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