सदर अस्पताल में मलेरिया की दवा नहीं
Updated at : 03 Mar 2016 12:33 AM (IST)
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लगातार फटकार के बावजूद नहीं सुधर रही है व्यवस्था सदर अस्पताल से मलेरिया विभाग को नहीं भेजा जाता इंडेंट कोडरमा : जिले में लगातार हो रहे प्रयासों के बावजूद सरकारी स्वास्थ्य सुविधा पटरी पर नहीं लौट रहा है. खासकर सदर अस्पताल की व्यवस्था पर आये दिन सवाल उठते रहे हैं. उपायुक्त हर बैठक में फटकार […]
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लगातार फटकार के बावजूद नहीं सुधर रही है व्यवस्था
सदर अस्पताल से मलेरिया विभाग को नहीं भेजा जाता इंडेंट
कोडरमा : जिले में लगातार हो रहे प्रयासों के बावजूद सरकारी स्वास्थ्य सुविधा पटरी पर नहीं लौट रहा है. खासकर सदर अस्पताल की व्यवस्था पर आये दिन सवाल उठते रहे हैं. उपायुक्त हर बैठक में फटकार लगाते हैं, लेकिन व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं हो रहा है. अब नयी जानकारी सामने आयी है कि सदर अस्पताल में मलेरिया बीमारी से इलाज की दवा नहीं है.
ऐसा नहीं है कि मलेरिया की दवा जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है, पर मरीजों को देने के लिए सदर अस्पताल में बुधवार को यह दवा उपलब्ध नहीं थी. पूछने पर बताया गया कि मलेरिया के लिए मात्र एक टेबलेट क्लोरोक्वीन है. जानकारों के अनुसार इस टेबलेट से मलेरिया कभी ठीक नहीं हो सकता. आम व्यक्ति को अगर मादा मच्छर अपनी डंक का शिकार बनाता है, तो उसे दो तरह के मलेरिया लक्षण का सामना करना पड़ सकता है.
पहला पीएफ केस यानी प्लाजमोडिन फ्लेजिफेरम व पीवी केस यानि प्लाजमोडिन विवेक्स केस. पीएफ केस में मरीज को एसीटी का डोज दिया जाता है, जबकि पीवी केस में क्लरोक्वीन के साथ प्राइमा क्वीन का डोज दिया जाता है. ये दवा मलेरिया विभाग के पास उपलब्ध है, लेकिन सदर अस्पताल में नहीं. पूछने पर बताया गया कि सदर अस्पताल की ओर से दवा खत्म होने या खत्म होने से पहले कोई इंडेट विभाग को दिया ही नहीं जाता या फिर कोई सूचना भी नहीं दी जाती है.
ऐसे में यह जानना ही मुश्किल हो जाता है कि दवा कब समाप्त हो रही है. हालांकि, मलेरिया विभाग से कर्मी सदर अस्पताल जाकर इसकी जानकारी लेकर दवा उपलब्ध कराते हैं. इधर, आरोप यह भी लग रहा है कि जान बूझकर सदर अस्पताल में जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं रहती हैं, ताकि मरीज बाहर बाजार से दवा खरीदने को मजबूर हों.
मलेरिया विभाग का आॅफिस कोडरमा में व स्टॉक रूम तिलैया में
मलेरिया विभाग का कार्यालय वैसे तो कोडरमा सदर अस्पताल परिसर में अगस्त 2015 में शिफ्ट हो गया है, लेकिन इसका स्टॉक रूम अभी भी तिलैया के प्रखंड कार्यालय परिसर में है. ऐसे में स्टॉक से दवा लाने में भी कर्मियों को परेशानी होती है. अगर स्टॉक रूम कोडरमा में ही होता तो जरूरत के अनुसार दवा शीघ्र उपलब्ध की जा सकती है.
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