बच्चों के संरक्षण की जिम्मेवारी सभी की

Updated at : 12 Jan 2015 9:14 AM (IST)
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बच्चों के संरक्षण की जिम्मेवारी सभी की

कोडरमा : जिला बाल संरक्षण इकाई के तत्वावधान में रविवार को हुई कार्यशाला में पोक्सो एक्ट, ट्रैफिकिंग और किशोर न्याय पर चर्चा की गयी. प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कानून सम्मत कार्य करने के टिप्स दिये. डीवीसी सर्किट हाउस परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि डीडीसी अभय कुमार सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक […]

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कोडरमा : जिला बाल संरक्षण इकाई के तत्वावधान में रविवार को हुई कार्यशाला में पोक्सो एक्ट, ट्रैफिकिंग और किशोर न्याय पर चर्चा की गयी. प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कानून सम्मत कार्य करने के टिप्स दिये.
डीवीसी सर्किट हाउस परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि डीडीसी अभय कुमार सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक संगीता कुमारी ने किया. डीडीसी ने कहा कि बच्चों के संरक्षण की जिम्मेवारी सभी की है. इसका अनुपालन गंभीरता से किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सभी विभागों का समन्वय कर बच्चों के सर्वोत्तम हित में कार्य किये जा सकते हैं. वहीं विशिष्ट अतिथि एसपी ने कहा कि पोक्सो एक्ट में पुलिस की दोहरी भूमिका है. आरोपी को सजा दिलाना व पीड़ित बच्चे को संरक्षण देना. लैंगिक अपराधों से बच्चों को बचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है.
कानून सम्मत धाराओं में पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर त्वरित न्याय की अनुशंसा भी की जा सकती है. पीड़ित बच्चे जहां भी चाहें बयान दर्ज कर सकते हैं. पीड़ित बच्चों की मेडिकल जांच महिला चिकित्सा पदाधिकारी करेगी तथा उसका बयान महिला अधिकारी ही दर्ज करेगी. वहीं स्थायी लोक अदालत की सदस्य जयश्री द्विवेदी ने कहा कि मैत्रिपूर्ण तरीके से किशोरों को न्याय दिलाने का प्रावधान है. बच्चों के साथ अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए.
मानव तस्करी पर चर्चा करते हुए दीया सेवा संस्थान के बैजनाथ कुमार ने कहा कि शोषण के उद्देश्य से कोई भी व्यक्ति यदि बच्चे को किसी कार्य के लिए भरती करता हो या उसे दूसरे जगह ले जाया जाता है, तो ट्रैफिकिंग की संज्ञा देने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि प्लेसमेंट के नाम पर झारखंड में मानव तस्करी की जा रही है. हर वर्ष इसके आंकड़े बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में हर साल करीब 60 हजार बच्चे लापता हो रहे हैं. यह मामला ट्रैफिकिंग से जुड़ा है.
सीआइडी ब्रांच रांची के विनेश प्रसाद शर्मा और आलोक कुमार ने कहा कि निर्भया कांड के बाद लैंगिक अपराधों से बच्चों को बचाने के लिए पोक्सो एक्ट लाया गया है. इसमें आरोपी को सात वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा दिलायी जा सकती है. यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ किसी भी तरह के सेक्सुअल वर्ताव को रोकने का सशक्त कानून है.
उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चे का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत अविलंब बयान दर्ज कराया जाना चाहिए. सबूत 30 दिन के अंदर जुटाने का प्रावधान किया गया है. एएसपी नौशाद आलम ने बाल विवाह पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक प्रखंड के बीडीओ को चाइल्ड मैरेज प्रोहीविसन पदाधिकारी बनाया गया है.
उन्होंने इसमें दंड के प्रावधान का जिक्र किया. सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष ममता सिंह, सदस्य मनोज कुमार दांगी, जेजेबी के सदस्य रूपा सामंता, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, एलपीओ दिनेश कुमार पाल ने अपने यूनिट के कार्यो की चर्चा की. इस मौके पर सभी थाना के प्रभारी, बाल कल्याण पदाधिकारी, सीडब्ल्यूसी के सदस्य राजकुमार सिन्हा, सत्येंद्र नारायण सिंह आदि थे. संचालन कोडरमा कीसीडीपीओ साधना चौधरी व धन्यवाद ज्ञापन डीएसपी हरिलाल यादव ने किया.
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