आदिम जनजाति की शर्मिला को मसीहे का इंतजार

कोडरमा बाजार : राज्य में जिसके विकास की बातों से राजनीति शुरू और खत्म होती है, वही आज हासिये पर खड़ा है. जी हां हम बात कर रहे हैं, राज्य के आदिम जनजाति के लोगों की. जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आदिम जनजातियों की एक बड़ी आबादी है, जिन्हें मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो […]
कोडरमा बाजार : राज्य में जिसके विकास की बातों से राजनीति शुरू और खत्म होती है, वही आज हासिये पर खड़ा है. जी हां हम बात कर रहे हैं, राज्य के आदिम जनजाति के लोगों की. जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आदिम जनजातियों की एक बड़ी आबादी है, जिन्हें मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाती है. इन्हीं आदिम जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में मरकच्चो प्रखंड के डगरनवां पंचायत का एक गांव कुरावां है. इस गांव के सहदेव सोरेन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
पेशे से मनरेगा मजदूर सहदेव सोरेन की सबसे बड़ी विवशता उसकी पुत्री शर्मिला है. उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय डगरनवां में दशवीं में अध्ययनरत शर्मिला को पिछले कुछ दिनों से सिर में दर्द व बुखार है. गरीब पिता ने अपने सामर्थ्य से भी आगे जाकर उसके इलाज में काफी खर्च कर दिया मगर स्थिति जस की तस है. आलम यह है कि अपनी पुत्री को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए दिन रात मेहनत करने वाला सहदेव सोरेन इन दिनों अपनी गरीबी के कारण अपनी लाडली बेटी की दिमागी बुखार का इलाज नहीं करा पा रहा है.
उसकी विवशता को देखते हुए शर्मिला सोरेन के स्कूल के एक शिक्षक ने प्रभात खबर को जानकारी देकर उक्त छात्रा को मदद की अपील की है. उक्त शिक्षक के मुताबिक अभी तक शर्मिला के इलाज में निर्धन पिता ने कर्ज लेकर करीब 17 से 18 हजार रुपये खर्च तो किया, परंतु बच्ची की हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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