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तमाड़ के मुख्य सड़कों की हालत बदतर

Updated at : 25 Jul 2025 5:12 PM (IST)
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तमाड़ के मुख्य सड़कों की हालत बदतर

झारखंड की राजधानी रांची के तमाड़ प्रखंड का पूरा शहरी क्षेत्र सड़क विकास के मामले में 25 वर्ष पीछे है.

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प्रतिनिधि, तमाड़.

झारखंड की राजधानी रांची के तमाड़ प्रखंड का पूरा शहरी क्षेत्र सड़क विकास के मामले में 25 वर्ष पीछे है. वर्ष 2000 के बाद आज तक तमाड़ की मुख्य सड़कों की मरम्मत नहीं हुई और न ही कोई नयी पक्की सड़क बनी. गड्ढों से भरी सड़कें, धूल, कीचड़ और जलजमाव ही इनकी पहचान बन गयी है.

हर दिन हजारों लोगों को परेशानी :

प्रखंड के 23 पंचायतों से ग्रामीण थाना, अस्पताल, बैंक व पोस्ट ऑफिस के काम से तमाड़ आते हैं. लेकिन तमाड़ पहुंचते ही ग्रामीणों का सामना टूटी-फूटी, व गड्ढों वाली सड़कों से होता है. सड़कें इतनी खराब हैं कि बाइक तक चलाना मुश्किल हो जाता है. बारिश के दिनों में कीचड़ और फिसलन, गर्मियों में उड़ती धूल और हर मौसम में गड्ढों का सामना करना तमाड़वासियों की नियति बन चुकी है.

जनता ने बार-बार उठाई मांग :

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागीय अधिकारियों से दर्जनों बार सड़कों को बनवाने की गुहार लगायी. लेकिन नतीजा अब तक शून्य रहा. तमाड़ के सभी रास्तों की हालत एक जैसी है. उखड़ी हुई सीमेंट की परतें, गहरे गड्ढे और हर कदम पर जोखिम. खासतौर पर रांची-टाटा मुख्य मार्ग पर हादसे के शिकार मरीज जब एंबुलेंस से तमाड़ अस्पताल लाये जाते हैं तो जर्जर सड़कें, उन्हें और तकलीफ पहुंचाती है.

ग्रामीण क्षेत्रों से निकलती है कई बसें, यात्री परेशान :

ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर तमाड़ से होकर रांची जाने के लिये नोढ़ी, पूरनानगर, पुंडीदीरी जैसे गांवों से कई बसे प्रतिदिन इन्हीं जर्जर सड़कों से होकर गुजरती हैं. सड़कों की स्थिति जर्जर होने से हिचकोले खाती बसों पर बैठे सवारियों को काफी परेशानी होती है. इन सड़कों से प्रतिदिन करीब 10 स्कूली बसें गुजरती है. इन बसों में छोटे बच्चे यात्रा करते हैं. जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है. अभिभावकों में भी डर का माहौल है. स्थानीय लोगों ने जल्द सड़क मरम्मत की मांग की है.

ग्रामीणों की खुली चेतावनी :

ग्रामीणों ने कहा है कि अगर जल्द सड़कों का निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं शुरू हुआ तो वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे. प्रभात खबर की यह ग्राउंड रिपोर्ट तमाड़ के उन सैकड़ों लोगों की आवाज है. जो हर दिन टूटे रास्तों से गुजरते हुए अब यही कह रहे हैं, हमें नहीं चाहिए सिर्फ वादा, हमें चाहिए पक्की सड़क और जल्दी चाहिए.

प्रखंड में 25 वर्षों से नहीं बनी एक भी पक्की सड़क

बॉक्स ::::::: जर्जर मुख्य सड़कें :

* तमाड़ स्टैंड से हॉस्पिटल जाने वाली पीसीसी सड़क.

* तमाड़ के बंगाली मोहल्ला में असीम हल्दार के घर से शिव मंडप होकर विमल पातर के घर तक पीसीसी सड़क.

* तमाड़ के नीचेटोली में विमल पातर के घर से गोलक दास अधिकारी के घर तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के कोठारी चौक से राजा मल्लिक के घर तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के मकवादर से सेठ मोहल्ला होकर पाखना घर तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के पंडा/प्रमाणिक मोहल्ला से मकवादर तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के राजा घर गेट से मकवादर तालाब तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के श्यामल नायक के घर से उप प्रमुख के घर होते हुए दीपक स्टूडियो के घर तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के परशुराम साहू के घर से चांदनी चौक तक पीसीसी पथ.

* तमाड़ के पप्पू गोराई के घर से खूंटी पथ तक पीसीसी पथ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHUBHAM HALDAR

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By SHUBHAM HALDAR

SHUBHAM HALDAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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