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खूंटी में ध्वस्त पुल की नहीं हुई मरम्मत, तो 80 दिन बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया डायवर्सन

Updated at : 08 Sep 2025 7:47 PM (IST)
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Khunti News benei river diversion

बनई नदी पर ध्वस्त पुल के बगल में श्रमदान से डायवर्सन का ग्रामीणों ने किया निर्माण. फोटो : प्रभात खबर

Khunti News: खूंटी जिले के बनई नदी पर पुल के ध्वस्त होने के 80 दिन बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया. विधायक और जिला प्रशासन ने जब अपना आश्वासन पूरा नहीं किया, तो ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिये डायवर्सन बनाने का फैसला किया. रविवार को काम शुरू हुआ और सोमवार शाम को इसे चलने लायक बना दिया गया. इसमें 300 ग्रामीण शामिल हुए.

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Khunti News: झारखंड के खूंटी जिले में बनई नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने के 80 दिन बाद भी जब उसकी मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने अपने दम पर वैकल्पिक मार्ग बनाने की ठान ली. करीब 300 ग्रामीण सामूहिक श्रमदान करते हुए पुल के किनारे वैकल्पिक सड़क का निर्माण शुरू हो गया है. पेलोल गांव के मुखिया ने सोमवार को यह जानकारी दी.

‘विधायक और जिला प्रशासन का आश्वासन निकला खोखला’

बिचना पंचायत के पेलोल गांव के ग्राम प्रधान शिवशंकर तिरु (42) ने बताया कि खूंटी से विधायक राम सूर्य मुंडा और जिला प्रशासन के खोखले आश्वासन से ग्रामीण निराश हैं. चाहे स्कूल जाने वाले बच्चे हों, गर्भवती महिलाएं हों, किसान हों या व्यापारी, सभी को टूटे हुए पुल की जगह एक वैकल्पिक सड़क न होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.

300 ग्रामीणों ने रविवार से शुरू कर दिया था काम

उन्होंने कहा कि पुल ढहने के बाद से लगभग 80 दिन बीत चुके हैं. वैकल्पिक सड़क बनाने के लिए ‘श्रमदान’ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. तिरु के अनुसार, पेलोल और पड़ोसी गांव बिचना, किंजला, अंगराबाड़ी, सरित खेल, घाघरा, डोरमा, सुंगी और हस्सा के लगभग 300 ग्रामीण रविवार दोपहर से इस काम में लग गये थे.

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Khunti News: ग्रामीणों ने 10 हजार रुपए दिये चंदा

उन्होंने कहा, ‘हमने ग्रामीणों से 10,000 रुपए चंदा इकट्ठा किया. पत्थर के टुकड़े, सीमेंट की बोरियां, नदी किनारे से रेत, मिट्टी और पत्थर इकट्ठा किये. वैकल्पिक सड़क का यह हिस्सा 200 मीटर से ज्यादा लंबा और लगभग 5 मीटर चौड़ा है.’

विधायक ने जून में किया था वैकल्पिक सड़क का शिलान्यास

श्रमदान में शामिल पेलोल के किसान लक्ष्मण महतो ने कहा, ‘यह उदाहरण है कि किस तरह सरकारी तंत्र ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने में विफल रहा है और उसने सिर्फ झूठे आश्वासन दिये हैं. हमने देखा कि कैसे स्थानीय विधायक ने जून में वैकल्पिक सड़क का शिलान्यास भी किया था. इसके बाद एक भी पत्थर नहीं लगाया गया. किसी भी सरकारी अधिकारी ने हमसे मिलने की जहमत तक नहीं उठायी.’

डायवर्सन के निर्माण में जुटे कई गांवों के लोग. फोटो : प्रभात खबर

19 जून को ढह गया था बनई नदी पर बना पुल

भारी बारिश के कारण 19 जून 2025 को यह पुल ढह गया था. यह घटना तब सुर्खियों में आयी, जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कई छात्र विद्यालय जाते समय ढहे हुए पुल को पार करने के लिए 25 फुट ऊंची बांस की सीढ़ी चढ़ते दिखाई दिये थे. वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने यहां से आवाजाही पर रोक लगा दी और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी. खूंटी से विधायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता राम सूर्य मुंडा से संपर्क करने का बार-बार प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

खूंटी की डीसी आर रॉनिटा ने कही ये बात

खूंटी की उपायुक्त आर रॉनिटा ने कहा, ‘पुल के ढहने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने इसकी मरम्मत और वैकल्पिक सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. यह काम राज्य सरकार के सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) को करना था. हमने अधिकारियों को सूचित कर दिया था और निविदा का काम पूरा हो गया. न केवल पुल की मरम्मत के लिए, बल्कि वैकल्पिक सड़क के निर्माण के लिए भी कार्यादेश जारी कर दिया गया था. मैं खूंटी स्थित आरसीडी इकाई के कार्यपालक अभियंता से बात करूंगी कि उन्होंने अब तक वैकल्पिक सड़क का निर्माण क्यों शुरू नहीं किया है.’

डायवर्सन बनाने के लिए श्रमदान करते ग्रामीण. फोटो : प्रभात खबर

ग्रामीणों ने ऐसे बनाया डायवर्सन

ग्रामीणों ने सबसे पहले पत्थरों को अस्थायी डायवर्सन में भरा. इसके बाद बोरियों में बालू और मिट्टी भरकर डायवर्सन को चलने लायक बनाया. अब आसानी से लोग पैदल और दोपहिया वाहन से इस डायवर्सन से नदी पार कर सकते हैं. ग्रामीणों के इस अभियान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कई पदाधिकारी भी शामिल हुए.

डायवर्सन की मरम्मती में ये लोग हुए शामिल

डायवर्सन मरम्मती में मुख्य रूप से शिव शंकर तिरु, लक्ष्मण महतो, राम महतो, जकरियस तिरु, दुर्गा स्वांसी, जगन्नाथ मुंडा, राजेश बोदरा, विशाल कंडुलना, बिरसा तिरू, मोहित तिरु, अभिषेक तिरु, मुकेश महतो, बंटी सिंह, संतोष सिंह सहित पेलोल, अंगराबाड़ी, कुंजला सहित आसपास के ग्रामीण शामिल थे. झामुमो के मगन मंजीत तिरु, नंदराम मुंडा, महेंद्र सिंह मुंडा, सोमा तिरु, विजय संगा, जॉनसन होरो, चार्ल्स पहान, विक्की श्रीवास्तव, रेला भेंगरा, बबलू नाग, सहाय टुटी और गोवर्द्धन महतो समेत अन्य लोग शामिल थे.

हो चुका है 1.80 करोड़ रुपए का टेंडर, बनना है पुल और डायवर्सन

पेलोल पुल के क्षतिग्रस्त होने बाद भी अब तक पुल के समीप डायवर्सन नहीं बन सका. हालांकि, डायवर्सन निर्माण के लिए सारी सरकारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से टेंडर हो चुका है. डायवर्सन निर्माण के लिए तब शिलान्यास भी किया गया था. इसके बाद भी अब तक डायवर्सन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है. एक अस्थायी डायवर्सन बना भी था, तो वह भी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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