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ईश्वर एक हैं, लेकिन रूप अनेक : स्वामी प्रमोद जी महाराज

Updated at : 16 Jan 2026 5:26 PM (IST)
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ईश्वर एक हैं, लेकिन रूप अनेक : स्वामी प्रमोद जी महाराज

दो दिवसीय वार्षिक सत्संग का समापन

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प्रतिनिधि,

खूंटी.

मुरहू चौक पर खूंटी जिला संतमत सत्संग द्वारा आयोजित दो दिवसीय वार्षिक सत्संग का शुक्रवार को समापन हो गया. सत्संग के दौरान प्रवचन में भागलपुर आश्रम के स्वामी प्रमोद जी महाराज ने कहा कि संसार में सभी सुख चाहते हैं. परंतु जल बीच मीन पियासी की तरह मनुष्य सच्चाई से भटकता रहता है. जहां-तहां सुख खोजता है. संसार में क्षणिक सुख है. सच्चा सुख परमात्मा की भक्ति और गुरु की बतायी युक्ति करने से मिलता है. उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है. निरंकारी हैं, लेकिन अनेक रूप और अनेक नामों से भी पूजे जाते हैं. जैसे कुएं का पानी एक है. हम अपनी इच्छा अनुसार पात्र में भरते हैं. स्वामी डॉ निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि ईश्वर की चर्चा करते रहने से सुख मिलता है. परमात्मा सबका एक ही है, हम अज्ञानता वश धर्म की लड़ाई लड़ते हैं. संतों ने बाहरी भक्ति पूजा और आंतरिक भक्ति ध्यान साधना बतायी है. स्वामी जयकुमार जी महाराज ने कहा कि जैसे मेंहदी में लाली है, उसी तरह परमात्मा भी कण-कण में व्याप्त हैं. स्वामी लक्ष्मण जी महाराज ने कहा जैसे दूध रखने के लिए स्वच्छ बर्तन चाहिए, वैसे भक्ति के लिए स्वच्छ मन, खानपान, व्यवहार जरूरी है. सत्संग में स्वामी नरेंद्र जी महाराज, स्वामी बालकृष्ण, स्वामी सत्यानंद, स्वामी अखिलेश बाबा, स्वामी राजेंद्र बाबा, स्वामी लाहिरी बाबा, दिगंबर बाबा, सोमनाथ ब्रह्मचारी सहित अन्य ने भी प्रवचन दिये. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने संतो से आशीर्वाद लिया. कहा कि हमें संतों की वाणी पर अमल करना चाहिए. संतगण भगवान और शास्त्रों की बातें हमें बताते हैं. जिससे जीवन का, समाज का और देश का कल्याण होता है. विशिष्ट अतिथि दिलीप मिश्रा, काशीनाथ महतो ने भी संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया. भंडारा का आयोजन किया गया. मौके पर डॉ डीएन तिवारी, संजय सत्संगी, मूचीराय मुंडा, रामहरि साव, गंगाराम समद, सगुन दास, दुखेंद्र ठाकुर, मंगल सिंह मुंडा, सुरेश पंडित, सूरजमल प्रसाद, सुबोध कुमार, कांडे मुंडा, हरिद्वार ठाकुर, सूरजलाल प्रसाद, संतोष गुप्ता, विष्णु मुंडा, रासबिहारी मुंडा, जगमोहन पूर्ति, सुरेश अकेला, अमर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे.

दो दिवसीय वार्षिक सत्संग का समापन

संतों की वाणी पर हमें अमल करना चाहिए : नीलकंठ सिंह मुंडाB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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CHANDAN KUMAR

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