खूंटी : घायलों के इलाज के लिए एसपी ने अपनी डॉक्टर पत्नी व अन्य चिकित्सकों को बुलाया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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घायलों के इलाज के लिए एसपी ने अपनी डॉक्टर पत्नी व अन्य चिकित्सकों को बुलाया
व्यवस्था की खुली पोल, खूंटी के सदर अस्पताल में नहीं थे चिकित्सक
रांची/खूंटी : खूंटी के सदर अस्पताल की व्यवस्था की पोल उस समय खुल गयी, जब शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को सदर अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था.
स्वास्थ्यकर्मी भी काफी कम संख्या में थे. मौके पर पहुंचे एसपी आशुतोष शेखर ने तत्काल मोर्चा संभाला. उन्होंने खूंटी और मुरहू के पुलिस अधिकारी और सशस्त्र बल को सदर अस्पताल बुलाया. जवानों को सड़कों पर तैनात कर दिया और रोड खाली कराने का निर्देश दिया, ताकि घायलों को लेकर एंबुलेंस आसानी से आ सके. इसके बाद एसपी आशुतोष शेखर ने अपनी डॉक्टर पत्नी और सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को अस्पताल बुलाया.
देखते ही देखते सदर अस्पताल में 15 से अधिक डॉक्टर पहुंच गये. वहीं लगभग 16 एंबुलेंस पहुंच गयी. इसके बाद सभी घायलों के इलाज में जुट गये. गंभीर रूप से घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस से रिम्स रेफर कर दिया गया. अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को देखते हुए एसडीपीओ आशीष कुमार महली ने शहर के समाजसेवियों को भी बुलाया. बड़ी संख्या में शहर के समाजसेवियों ने भी घायलों की मदद की.
इन्होंने की मदद : घायलों की मदद करनेवालों में विनोद जायसवाल, प्रियांक भगत, सुनील साहू, विशाल साहू सहित विहिप और बजरंग दल के कई युवक शामिल थे. उनके साथ शंकर सिंह मुंडा, रमेश पटेल, एसडीपीओ आशीष कुमार, उनका बॉडीगार्ड धनंजय कुमार, मुरहू थाना प्रभारी पप्पू कुमार शर्मा, खूंटी थाना में तैनात बिरजू प्रसाद, मोहम्मद आरिफ, निकेश जायसवाल, विपुल जायसवाल, डॉ अजीव नयन, डॉ एम जमाल, डॉ सुनील खलखो सहित कई अन्य डॉक्टर शामिल थे.
नीलिमा बोदरा की नर्स की पढ़ाई काम आयी
सदर अस्पताल में भर्ती अपने एक परिचित को देखने पहुंची नीलिमा बोदरा ने नर्स का काम संभाला. अस्पताल में नर्स की कमी को देखते हुए उसने डॉक्टर के परामर्श से घायलों को इंजेक्शन देना शुरू किया. उनके साथ आये अन्य रिश्तेदारों ने भी घायलों के इलाज में मदद की. नीलिमा ने बताया कि उसने हाल में ही नर्स की पढ़ाई पूरी की है.
घायलों के पहुंचते ही रिम्स में मच गयी अफरा-तफरी
खूंटी से घायलों को एंबुलेंस (108) से रिम्स लाया गया था. घायलों के रिम्स पहुंचते ही यहां अफरा-तफरी मच गयी. हालांकि सूचना मिलते ही सीनियर डॉक्टर, पीजी डॉक्टर व नर्स सेंट्रल इमरजेंसी में पहुंच गये थे़ ट्रॉली मैन घायलों को सेंट्रल इमरजेंसी पहुंचा रहे थे़ इसके बाद घायलों के इलाज में सीनियर डाॅक्टर, जूनियर डॉक्टर व नर्स जुट गये. इस दौरान सेंट्रल इमरजेंसी में थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी.
ह्वाट्सऐप पर सूचना मिलते ही इमरजेंसी पहुंचे जूनियर डॉक्टर
रिम्स इमरजेंसी में घायलों के पहुंचते ही जूनियर डॉक्टरों ने अपने ह्वाट्सऐप ग्रुप पर इसकी जानकारी डाल दी. सूचना मिलते ही जूनियर डॉक्टर जहां थे, वहां से सीधे रिम्स इमरजेंसी पहुंच गये और घायलों के इलाज में लग गये. डॉक्टरों ने मरीजों के इलाज के साथ-साथ उन्हें स्ट्रेचर व व्हीलचेयर से लेकर बेड तक पहुंचाया. ड्यूटी नहीं होने के बावजूद 30 से 35 जूनियर डॉक्टर इलाज में सहयोग करने के लिए आ गये थे. इसमें हड्डी, न्यूरो, आई व इएनटी के जूनियर डॉक्टर शामिल थे.
रिम्स के प्रशासनिक अधिकारी रहे मुस्तैद, बाहर से भी मंगायी दवा
एक साथ गंभीर रूप से घायल 26 लोगों के इमरजेंसी पहुंचने की सूचना मिलते ही रिम्स के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गये. निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह, अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप, उपाधीक्षक डॉ संजय कुमार सहित कई अधिकारी पहुंचे. मेडिसिन व सर्जरी स्टोर के इंचार्ज व कर्मचारियों को बुला लिया गया. रिम्स में उपलब्ध दवाओं के अलावा इंडेंट कर निजी दवा दुकानों से जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक मंगा लिया गया.
महाराष्ट्र के संदीप पाटिल को मिली नयी जिंदगी
महाराष्ट्र के रहनेवाले 38 वर्षीय संदीप कैलाश पाटिल को जूनियर डॉक्टरों ने नयी जिंदगी दी. संदीप अचेत अवस्था में रिम्स इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर पड़े हुए थे. स्ट्रेचर पर पड़े संदीप को जूनियर डॉक्टरों ने करीब 15 मिनट तक कार्डियेक मसाज (सीपीआर) किया. इसके अलावा डिफिब्रिलेटर (बिजली का झटका) से भी इलाज किया गया. इससे मरीज का दिल धड़कने लगा.
अमेरिका की सोफियान ने भी की मदद
अमेरिका निवासी सोफियान अपनी संस्था अमेजिंग फैक्ट के साथ रांची जा रही थी. जब उसने रास्ते में घायलों को देखा, तो उसकी मदद करने लग गयी. संस्था के सदस्यों के साथ मिल कर उन्होंने भी घायलों को अस्पताल पहुंचाया. ट्रक में फंसे चालक को निकालने के लिए वह खुद ट्रक पर चढ़ गयी. सदर अस्पताल में भी उसने घायलों के इलाज में मदद की. सोफियान नर्सिंग की छात्र है.
पहले से तैयार नहीं था रिम्स का ट्रॉमा सेंटर
रिम्स में ट्रॉमा सेंटर का उदघाटन हाे गया है, लेकिन वहां क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) का संचालन किया जा रहा है. ट्राॅमा सेंटर तैयार नहीं था. इसको निचले तल्ले पर शुरू करना था, जिसके कारण अचानक 26 मरीजों के आने से दिक्कत शुरू हो गयी. वहां बेड व कंबल की व्यवस्था ही वहां नहीं थी. हालांकि बाद में आनन-फानन में इसकी व्यवस्था कर ली गयी.
रिम्स पहुंचे अर्जुन मुंडा और बाबूलाल
रांची : खूंटी में हुई सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों से मिलने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी रिम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे. दोनों नेताओं ने घायलों के इलाज व चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी ली. निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने उन्हें बताया कि मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है.
हर संभव मदद की जा रही है. अर्जुन मुंडा व बाबूलाल मरांडी ने घायलों से भी मुलाकात की. दोनों नेता करीब आधा घंटा तक ट्रॉमा सेंटर में रहे. श्री मरांडी ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है. रिम्स के डॉक्टर लगे हुए हैं. वहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि रिम्स में तत्काल इलाज की व्यवस्था की गयी, जो सराहनीय है.
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