सीसीएल अधिकारियों ने किया भू-धंसान क्षेत्र का निरीक्षण, जामुनदोहर बस्ती के लोगों को मिलेगा अस्थायी आवास

भू-धंसान से प्रभिवत लोगों को मुआवजा मिलने तक अस्थायी आवास मिलेगा. दो दिन पूर्व भारी बारिश के कारण बस्ती के नजदीक हो गया था भू-धंसान.
रांची : खलारी अंचल के विश्रामपुर मौजा अंतर्गत जामुनदोहर बस्ती के प्रभावित लोगों को मुआवजा मिलने तक अस्थायी आवास दिया जायेगा. सोमवार को जामुनदोहर बस्ती के निकट भू-धंसान का निरीक्षण करने गये एनके एरिया जीएम संजय कुमार ने यह आश्वासन दिया है. ज्ञात हो कि जामुनदोहर बस्ती लंबे अरसे से बंद भूमिगत कोयला खदान के उपर ही बसा है.
दो दिन पूर्व हुई भारी बारिश के कारण बस्ती के नजदीक भू-धंसान हो गया है. सूचना मिलने पर एनके महाप्रबंधक संजय कुमार, केडीएच परियोजना पदाधिकारी जे अब्राहम तथा खलारी अंचल निरीक्षक कुमार सत्यम भारद्वाज ने भू-धंसान स्थल का निरीक्षण कर बस्ती के लोगों से बातचीत की.
अधिकारियों ने कहा कि जामुनदोहर बस्ती के विस्थापन के लिए एक कमेटी बनाकर आकलन किया जायेगा. निरीक्षण के दौरान रैयत विस्थापित मोर्चा के इकबाल हुसैन, रामचंद्र उरांव, बिगनसिंह भोगता, जालिम सिंह, रंथू उरांव, अमृत भोगता, रतिया गंझू, रामलखन गंझू, सुनील कुमार सिंह, दुलार गंझू, विनय खलखो, प्रभाकर गंझू, दामोदर गंझू, नरेश गंझू, आजाद अंसारी, करमा तुरी, पजु महतो, तौहीद अंसारी सहित ग्रामीण उपस्थित थे.
पहले भी जामुनदोहर बस्ती तथा आसपास के इलाके में भू-धंसान की घटना हुई है. बस्ती के लोग कोल इंडिया के रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी के तहत मिलने वाले मुआवजा के आस में बस्ती छोड़ना नहीं चाहते हैं और जोखिम लेकर भी वहां रह रहे हैं.
बस्ती में कई ऐसे लोग भी हैं, जो पूर्व में दूसरी जगह से विस्थापित हैं और आर एंड आर पॉलिसी का लाभ ले चुके हैं. बताया जाता है कि क्षेत्र में अनेक ऐसे लोग हैं जो योजनाबद्ध तरीके से सीसीएल क्षेत्र में ही एक जगह विस्थापित किये जाने के बाद वैसी जगह घर बना लेते हैं. जहां से फिर से आर एंड आर पॉलिसी का लाभ मिल सके. ऐसे लोगों को चिह्नित करने की जिम्मेवारी सीसीएल प्रबंधन की है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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