झारखंड में संजीवनी बनी मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना, 18 लोगों को सहायता देगी सरकार

झारखंड में कैंसर मरीजों की संख्या में बढ़ रही है. एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक फोटो
MGBU Yojana: झारखंड में मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत 18 गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को बड़ी सहायता मिली है. राज्यस्तरीय समिति की बैठक में कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों को मेडिकल ग्रांट मंजूर किया गया है. एक मामले को मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा गया है. बैठक में वेरिफिकेशन प्रक्रिया को सख्त करने और आवेदन प्रणाली में ट्रांसपैरेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
MGBU Yojana: झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना (एमजीबीयू योजना) एक बार फिर गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए संजीवनी साबित हुई है. सरकार की इस योजना के तहत राज्यस्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में 18 गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को चिकित्सा सहायता देने पर मंजूरी प्रदान की गई. इस बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसायटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की. बैठक का उद्देश्य जिलास्तरीय समितियों की ओर से 5 लाख रुपये से अधिक और 20 लाख रुपये तक की सहायता राशि की रिकमंडेशन से जुड़े मामलों पर विचार करना था. इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और मरीजों के मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई.
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
राज्यस्तरीय समिति की इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के निदेशक डॉ सिद्धार्थ सान्याल, अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, महाप्रबंधक जसास प्रवीण चंद्र मिश्रा सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और आंतरिक वित्तीय सलाहकार मौजूद रहे. समिति के सामने कुल 18 गंभीर मरीजों के मामले पेश किए गए, जिनमें कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और ब्लड कैंसर जैसे गंभीर बीमारी शामिल थे. समिति ने सभी मामलों की मेडिकल रिपोर्ट, आर्थिक हालत और इलाज अनुमान का गहन अध्ययन किया, जिसके बाद सहायता राशि मंजूर करने पर सर्वसम्मति बनी.
18 मरीजों के इलाज के लिए सहायता राशि मंजूर
बैठक में गंभीर बीमारी से ग्रस्स 18 मरीजों को मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत मेडिकल ग्रांट देने का फैसला किया गया. इन मरीजों में कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और ब्लड कैंसर से पीड़ित लोग शामिल हैं. जिला स्तरीय समितियों की ओर से भेजी गई अनुशंसाओं को स्वीकृति प्रदान करते हुए जल्द ही पैसा जारी करने के निर्देश दिए गए, ताकि इलाज में किसी प्रकार की देरी न हो. समिति ने स्पष्ट किया कि इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना जरूरी है.
एक मामले में मंत्रिपरिषद को भेजा जाएगा प्रस्ताव
बैठक में एक ऐसे मरीज का मामला सामने आया, जिसके उपचार पर अनुमानित खर्च 16 लाख रुपये से अधिक है. चूंकि यह राशि निर्धारित सीमा से अधिक है, इसलिए राज्यस्तरीय समिति ने इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए भेजने का फैसला किया है. मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित मरीज को भी योजना के तहत सहायता राशि प्रदान की जाएगी.
वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और सख्त करने के निर्देश
बैठक के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ जिलों से प्राप्त आवेदनों में मरीज की वर्तमान मेडिकल कंडीशन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. इस पर कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे खुद या नामित पदाधिकारी के माध्यम से मरीजों का फिजिकल वेरिफिकेशन सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी मरीज का वेरिफिकेशन किया जा सकता है, ताकि योजना का लाभ सही और वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे.
आवेदन प्रक्रिया में ट्रांसपैरेंसी पर जोर
कार्यकारी निदेशक ने यह भी निर्देश दिया कि अस्पतालों से प्राप्त इलाज के अनुमान का वेरिफिकेशन संबंधित सिविल सर्जन की ओर अनिवार्य रूप से किया जाए. वेरिफिकेशन के बाद ही प्रस्ताव निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं के माध्यम से राज्यस्तरीय समिति के सामने पेश किए जाएं. इससे योजना की ट्रांसपैरेंसी बनी रहेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगेगी.
राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
राज्य सरकार ने दोहराया कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को समय पर और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. सरकार का प्रयास है कि किसी भी मरीज को केवल आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न होना पड़े.
सबसे अधिक कैंसर के मरीज
स्वीकृत मामलों में सबसे अधिक कैंसर पीड़ित मरीज शामिल हैं, जिनमें कोलन कैंसर, सर्विक्स कैंसर, फेफड़े का कैंसर, मेटास्टेटिक एडेनोकार्सिनोमा, गॉलब्लैडर कैंसर और स्तन कैंसर से पीड़ित मरीज हैं. तीन मरीज किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित हैं, जबकि एक मरीज ब्लड कैंसर से पीड़ित है. इनमें एक नाबालिग मरीज भी शामिल है, जिसे गंभीर दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए सहायता दी जाएगी.
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इन मरीजों को मिलेगी आर्थिक सहायता
- सरिता देवी: कोलन कैंसर (रीकरेंट डिजीज)
- शाहिना परवीन: सर्विक्स कैंसर
- परेश कुमार शर्मा: मेटास्टेटिक एडेनोकार्सिनोमा
- लक्ष्मी नाथ साहू: कैंसर (सीए आरएमटी-दाहिनी ओर)
- लैलुन खातून: फेफड़े का कैंसर
- उषा शर्मा: गॉलब्लाडर का एडेनो-स्क्वैमस कार्सिनोमा
- जब्साना कैबर्त्ता: सर्विक्स कैंसर (रेक्टोवैजाइनल फिस्टुला सहित)
- मो हारून रशीद: कोलन कैंसर (मेटास्टेटिक)
- अफसाना खातून: मेटास्टेटिक पेट का कैंसर
- मास्टर दिव्यांशु कुमार: मल्टीसिस्टम लैंगरहैंस सेल हिस्टियोसाइटोसिस
- अजमुल अंसारी: मेटास्टेटिक फेफड़े का कैंसर
- उर्मिला करुआ: सर्विक्स कैंसर (स्टेज–IV)
- सलमा परवीन: बाएं ब्रेस्ट का कैंसर
- नर्गिस आरा: एडेनोकार्सिनोमा (जीई जंक्शन)
- मंडीप कुमार: किडनी ट्रांसप्लांट
- जीतबहन मछवा: किडनी ट्रांसप्लांट
- आदित्य कुमार: किडनी ट्रांसप्लांट
- मिस राजनंदिनी कुमारी: ब्लड कैंसर
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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