आदिवासी समाज नशे के कारण टूटता व बिखरता जा रहा है : सीओ

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आदिवासी समाज नशे के कारण टूटता व बिखरता जा रहा है : सीओ

विद्यासागर. करमाटांड़ प्रखंड कार्यालय के सभागार में सीओ चोनाराम हेंब्रम ने अंचल के 61 मौजा के मांझी हाड़ाम के साथ बैठक की.

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करमाटांड़ में आदिवासी संताल समाज के गणमान्य लोगों की हुई बैठक प्रतिनिधि, विद्यासागर. करमाटांड़ प्रखंड कार्यालय के सभागार में सीओ चोनाराम हेंब्रम ने करमाटांड़ अंचल के 61 मौजा के मांझी हाड़ाम, जोग मांझी, भोद्दो, पाराणिक, जोग पाराणिक, लासेरसाल, नायके, कुडाम नायके, गोडेत के साथ बैठक की. सीओ ने कहा आदिवासियों की परंपरागत स्वशासन व्यवस्था को बनाये रखने के लिए कई कानून बना है. उसे जानने व समझने की जरूरत है. इन सभी कानूनों को जानने के लिए अपने बाल बच्चे को सही तरीका से पढ़ाना लिखाना होगा. आदिवासी समाज में नशा काफी जोर पकड़े हुए हैं. इससे समाज टूटता एवं बिखरता जा रहा है. आज अधिक से अधिक युवा पीढ़ी हड़िया एवं दारू में व्यस्त रहते हैं. इससे अपने आपको बचा पाना आने वाले समय में काफी मुश्किल होगा. आज इस समाज के लोगों को हांड़िया-दारु पिलाकर, बहला फुसलाकर एवं कुछ रुपया देकर दूसरे लोग आपकी जमीन को अवैध तरीके से ले लेते हैं. इससे हमारे समाज को बचाना बहुत जरूरी है. वहीं शिकरपोसनी मुखिया मंगल सोरेन ने कहा कि हमारे समाज के लोग अंचल सभागार भवन में बैठकर सीओ की बातों को काफी ध्यान से सुना. आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए पेसा कानून लागू होना जरूरी है. समाज में पिछड़ापन का मुख्य कारण, हाड़िया-दारू के बढ़ते प्रचलन है. इसे रोकने के लिए नशामुक्ति अभियान चलाये जाने की जरूरत है. बैठक की अध्यक्षता बीर मांझी बाबूलाल सोरेन ने की. संचालन समाजसेवी सनातन सोरेन ने किया. बैठक को सत्य सोरेन नायके भगवानपुर, समाजसेवी योगेन्द्र टुडू, लखीनारायण सोरेन एवं हेनो मरांडी ने भी संबोधित किया. इस दौरान सामाजिक मुद्दों को लेकर गहन चर्चा की गयी. इसमें पेसा कानून को अविलंब लागू किया जाय, मांझी हाड़ाम की अध्यक्षता में ग्रामसभा कर गांव समाज के जीतने भी पदधारक हैं उन्हें चिह्नित किया जाय, ताकि उनको भी सरकार से मानदेय की राशी मिल सके. अब तक सरकार के द्वारा पांच पदधारकों मांझी हाड़ाम, जोग मांझी, पाराणिक, नायके व गोडेत को ही मानदेय राशि देने का प्रावधान है. बाकी चार पदधारक कुडाम नायके, जोग पाराणिक, लासेरसाल व भोद्दो को भी मानदेय देने की मांग की जाय.

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जियाराम मुर्मू

लेखक के बारे में

By जियाराम मुर्मू

मैं जियाराम मुर्मू वर्ष 2009 से प्रभात खबर, जामताड़ा से जुड़ा हुआ हूं. मैं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की जनमुद्दे जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, ग्रामीण विकास सहित ग्रामीणों की समस्याओं को लगातार उठा रहा हूं.

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