मुरलीपहाड़ी. विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना 23 जनवरी को होगी. इसे लेकर प्रतिमा निर्माण में कलाकार जुट गए हैं. कारीगरों ने बताया कि अबकी साल 1500 रुपये से लेकर 6000 हजार रुपये तक का मूर्ति निर्माण किया जा रहा है. छोटा व बड़ा दोनों साइज में मूर्ति का निर्माण हो रहा है. बताया कि दो दशक पूर्व जहां 50-100 रुपये में मूर्ति मिल जाती थी. वह बढ़कर अब 1500 से 6000 हजार रुपये में बिक रही है. नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव निवासी डब्लू धीवर कहते हैं कि वह पिछले 30 वर्षों से सरस्वती मां की मूर्ति का निर्माण करते आ रहे हैं. शुरुआत में 50-100 रुपये में प्रतिमा बेचते थे. वर्तमान में 1500 रुपये से लेकर 6000 हजार रुपये तक की मूर्ति का निर्माण करते हैं. कहा कि कच्चा व्यवसाय है तो कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ता है. प्रतिमा निर्माण के लिए मोटा मिट्टी तो गांव में ही मिल जाती है, लेकिन चिकनी मिट्टी आसानी से नहीं मिलती है. इसे खरीद कर लाना पड़ रहा है. लकड़ी भी खरीद कर प्रतिमा निर्माण कर रहे हैं. मूर्ति निर्माण के लिए कील, पेंट, रंग, सुतली, पुआल, बांस सहित अन्य सामग्री की कीमत में वृद्धि होने से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. प्रतिमा निर्माण में 15-16 घंटे मेहनत करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अब तो मजदूर भी नहीं मिलते हैं. खुद ही निर्माण करना पड़ता है. बताया कि मेहनत व लागत के अनुरूप पैसे नहीं मिलते, लेकिन इस काम में नुकसान नहीं होता है.
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