नारायणपुर. प्रखंड के दक्षिणीडीह में आयोजित नौ दिवसीय मारुति नंदन रुद्र महायज्ञ के प्रथम दिन सोमवार को कथा में मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने प्रवचन दिया. कहा कि श्रीराम कथा हमें मर्यादा में रहना सिखाती है. यह मानव का सही मार्गदर्शन भी करती है, जो मनुष्य सच्चे मन से श्रीराम कथा का श्रवण कर लेता है, उसका लोक ही नहीं परलोक भी सुधर जाता है. मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है और बहुत सत्कर्मों के बाद ही मनुष्य का जीवन मिलता है. उन्होंने कहा कि मनुष्य को इसका सदुपयोग करना चाहिए और राम नाम का जप करते हुए अपने लोक व परलोक को सुधारना चाहिए. कलियुग में मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा राम नाम ही है. कथावाचिका ने कहा कि हमें अपने दाम्पत्य जीवन में गंभीर होना चाहिए. पति-पत्नी, भाई- बहन, भाई-भाई का प्रेम, पिता-पुत्र, सास-बहू सभी को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए. रामायण हमें मर्यादा सिखाती है. रामायण को प्रतिदिन श्रवण करने से मानसिक संतुलन ठीक रहता है, जो मनुष्य तुलसीदल की शरण आएगा वह हर प्रकार के दल-दल से बच जायेगा. तुलसी की माला भगवान की पहचान है हमें गले में तुलसी की माला पहनना चाहिए. गले में तुलसी की माला और मुख में राम यही हमारे सकारात्मक भाव होना चाहिए. उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि गुलाब का फूल दिखने में सुंदर है पर चखने में मीठा नहीं होता, गन्ना दिखने में सुंदर नहीं पर चखने में मीठा होता है, किंतु हमें अपना स्वभाव सुंदर और मीठा बनाना है तो भगवान राम की कथा कहना व सुनना चाहिए. इससे हमारा स्वभाव मधुर, मनोहर और मंगलकारी हो जायेगा. कथा सुनने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. वहीं धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन से क्षेत्र में माहौल भक्तिमय बना हुआ है.
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