नारायणपुर. दक्षिणीडीह में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने विवाह प्रसंग सुनाया. भगवान राम व माता सीता के विवाह का वर्णन किया. कहा कि मानव जीवन में विवाह का अत्यंत महत्व है. विवाह से मानव को दो कुलों के उत्तरदायित्व का बोध होता है. कथा में प्रभु श्रीराम के जनकपुर आगमन तथा प्रभु श्रीराम और मां मैथली के पुष्प वाटिका प्रसंग को ऐसे प्रस्तुत किया, जिससे सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये. कहा कि जब ठाकुर श्री रामलला जनकपुर पहुंचे, तो उन्होंने सबको अपना-अलग अलग रूप दिखलाया, जिनकी जिस प्रकार की भावना हृदय में थी. उन्हें उसी रूप में दर्शन दिया, जो ऋषि थे उन्हें ब्रह्म रूप में दर्शन दिए, जिन्होंने राजकुमार समझा उन्हें उसी रूप में, जिन्होंने प्रेम से देखा उन्हें प्रेम रूप में, जो ज्ञानी थे उन्हें ज्ञान रूप में दर्शन दिए. उन्होंने हरि नाम की विशेषता बतलायी. हरिनाम के बिना जीवन रूपी नैया पार नहीं लग सकती. सभी को समय निकाल कर प्रतिदिन हरिनाम का सुमिरन करना चाहिए. कहा लोगों के पास आज के युग में मोबाइल चलाने के लिए समय है पर हरिनाम के बारे में कहे तो कहते हैं कि बुढ़ापे में कर लेंगे. इस मृत्यु लोक में एक दिन का ठिकाना नहीं तो फिर हमारी मृत्यु बुढ़े होकर ही होगी इसकी क्या गारंटी है. कहा जब आपके पास समय है भजन कर लें, अन्यथा इसी लोक में भटकते रहेंगे.
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