भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का किया उद्धार : कथावाचक

श्रीराम कथा के नौवें दिन कथावाचक हरिदास अंकित कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीराम की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया.
जामताड़ा. गांधी मैदान पर चल रहे श्रीराम कथा के नौवें दिन कथावाचक हरिदास अंकित कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीराम की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया. बताया कि हनुमान जी के कहने पर भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई. बालि का भगवान ने संहार किया. इसके बाद हनुमान जी ने लंका दहन किया. कहा माता सीता की खोज की. प्रभु को आकर के माता सीता का समाचार दिया. भगवान ने बंदरों को आदेश दिया कि चलो लंका पर आक्रमण करें. भगवान ने सेतु बंधन का निर्माण किया. समुद्र के ऊपर सेतु बांधने के बाद समस्त वानर को लेकर भगवान लंका पधारे. लंका में जाकर के अंगद जी को शांति दूत बनाकर के भगवान ने भेजा, रावण को समझाने के लिए. इसके बाद जब रावण नहीं माना तब भयंकर संहार लंका का हुआ. रावण का उद्धार प्रभु ने किया. लंका का राजा विभीषण को बनाकर के भगवान अयोध्या पधारे. अयोध्या में प्रभु का सुंदर राज्याभिषेक हुआ और राज्य में बैठकर के अनेकों प्रकार की लीलाएं भगवान ने की. भगवान का सुंदर समाज में त्रिलोकी में यश फैला, जो आज भी प्रचलित है कि राज्य हो तो राम जैसा राजा प्रभु राम. वहीं मुख्य यजमान तरुण गुप्ता ने बताया कि शनिवार को कथा का समापन होगा. शनिवार दोपहर 12 बजे से, राधे रानी के साथ फूलों की होली खेली जायेगी. भंडारे का आयोजन होगा. मौके पर मंच से महाराज जी ने दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन, मोहन बर्मन, नित्य गोपाल सिंह, प्रभु मंडल, सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया.
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