बिहार में रिकॉर्ड तोड़ बिजली की खपत, गर्मी के साथ रसोई गैस संकट ने बिगाड़ा खेल

सांकेतिक तस्वीर
Patna News: पटना में मार्च की शुरुआत के साथ ही बढ़ती गर्मी और गैस संकट का असर अब बिजली खपत पर साफ दिखने लगा है. पिछले साल के मुकाबले इस बार बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. आंकड़ों के मुताबिक 18 मार्च को जहां पिछले साल 405 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है.
Patna News: बिहार में मार्च में ही तापमान बढ़ने के साथ लोगों ने पंखा, कूलर और एसी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. यही वजह है कि बिजली की खपत में अचानक उछाल आया है. पिछले साल जहां मार्च के अंत तक खपत 500 मेगावाट के आसपास रहती थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा पहले ही पार हो चुका है.
बढ़ती बिजली खपत के पीछे एक और बड़ा कारण गैस संकट है. एलपीजी की अनिश्चित आपूर्ति के कारण लोग खाना बनाने के लिए इंडक्शन और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे घरेलू बिजली खपत में अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जो पहले के मुकाबले ज्यादा है.
पटना बना बिजली खपत का ‘पावर हब’
पूरे बिहार की बात करें तो वर्तमान में राज्य में कुल 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है, जिसमें अकेले पटना जिला 600 से 650 मेगावाट के साथ सबसे आगे है.
अन्य प्रमुख शहरों में मुजफ्फरपुर 210 मेगावाट, गया 243 मेगावाट और पूर्णिया 128 मेगावाट की औसत खपत दर्ज कर रहे हैं. बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे पीक ऑवर्स के दौरान बिजली का संयम से उपयोग करें ताकि सिस्टम पर अत्यधिक बोझ न पड़े.
इंडक्शन का बढ़ता क्रेज
बिजली की इस रिकॉर्ड तोड़ खपत के पीछे सिर्फ तपता सूरज ही इकलौता कारण नहीं है. शहर में चल रहे ‘गैस संकट’ ने भी आग में घी डालने का काम किया है. एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण पटना के हजारों घरों में अब खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक ओवन का उपयोग तेजी से बढ़ा है.
इसके अलावा, मार्च के दूसरे पखवाड़े से ही घरों में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर (AC) पूरी रफ्तार से चलने लगे हैं. बिजली कंपनी का अनुमान है कि पिछले साल जहां अधिकतम खपत 883 मेगावाट थी, इस साल वह 1000 मेगावाट के जादुई आंकड़े को भी पार कर सकती है.
31 मार्च तक का डेडलाइन
ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च तक राज्य भर में मेंटेनेंस का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए. पटना समेत सभी जिलों के इंजीनियरों को टास्क दिया गया है कि वे ‘जीरो ट्रिपिंग’ सुनिश्चित करें.
अनावश्यक फॉल्ट और तकनीकी बाधाओं को रोकने के लिए ग्रिड की स्थिरता और वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार पर जोर दिया जा रहा है. पेसू की टीम ट्रांसमिशन लाइनों और ट्रांसफार्मरों का नियमित निरीक्षण कर रही है ताकि गर्मी के चरम पर पहुंचने के दौरान शहर को अंधेरे का सामना न करना पड़े.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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