2022, 23, 24 में मिली लगातार असफलता, फिर भी नहीं मानी हार, जानें UPSC CAPF में 184वीं रैंक लाने वाले अंकुर की सक्सेस स्टोरी

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अंकुर को मिठाई खिलाते परिजन

UPSC CAPF Success Story : सोनपुर के अंकुर ने तीन असफलताओं के बावजूद UPSC CAPF असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में 184वीं रैंक हासिल की है. उनकी यह कहानी हार न मानने और निरंतर प्रयास की मिसाल है. यह युवाओं को प्रेरणा देती है कि असफलता अंतिम नहीं है.

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सारण से यशवंत सिंह की रिपोर्ट

UPSC CAPF Success Story : सारण के सोनपुर निवासी अंकुर ने UPSC CAPF Assistant Commandant परीक्षा में ऑल इंडिया 184वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता दर्ज की है. अंकुर की यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले उन्हें लगातार तीन प्रयासों में अलग-अलग स्तर पर असफलता का सामना करना पड़ा था. 2022 में लिखित परीक्षा में चयन नहीं हुआ, 2023 में भी सफलता नहीं मिली और 2024 में अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद चयन नहीं हो सका. इसके बाद भी अंकुर ने तैयारी नहीं छोड़ी और आखिरकार सफलता हासिल की.

तीन बार असफलता, फिर भी नहीं मानी हार

अंकुर की सफलता की कहानी लगातार प्रयास की मिसाल है. 2022 में वह लिखित परीक्षा के बाद चयनित नहीं हो सके. इसके बाद 2023 में भी उन्हें सफलता नहीं मिली. इन लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और अपनी रणनीति में सुधार करते रहे.

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2024 में अंतिम चरण तक पहुंचे, लेकिन रह गयी कमी

2024 में अंकुर ने परीक्षा के अंतिम चरण तक पहुंचकर अपनी क्षमता साबित की, लेकिन अंतिम चयन में जगह नहीं बना सके. इस असफलता के बाद उन्होंने अपनी तैयारियों और कमियों का दोबारा आकलन किया. इसके बाद उन्होंने उन कमजोर पहलुओं पर काम किया, जिनकी वजह से पिछले प्रयासों में सफलता नहीं मिल सकी थी.

लगातार मेहनत का मिला परिणाम

अंकुर ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी. उन्होंने लगातार अभ्यास किया और पिछली गलतियों से सीखते हुए अपनी तैयारी को बेहतर बनाया. आखिरकार UPSC CAPF Assistant Commandant परीक्षा में ऑल इंडिया 184वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपने लक्ष्य को पूरा कर लिया.

परिवार और सोनपुर में खुशी का माहौल

अंकुर की सफलता की खबर सामने आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. उनकी उपलब्धि से सोनपुर क्षेत्र के लोग भी उत्साहित हैं. लगातार असफलताओं के बाद हासिल की गयी यह सफलता उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए खास उपलब्धि मानी जा रही है.

युवाओं के लिए मिसाल बनी अंकुर की कहानी

अंकुर की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा देती है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलताओं का सामना कर रहे हैं. उनकी सफलता बताती है कि एक परीक्षा में असफल होना अंतिम परिणाम नहीं होता. अपनी कमियों को पहचानकर लगातार सुधार और प्रयास जारी रखने से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

असफलता से सीखकर बदली तैयारी

अंकुर ने पिछले प्रयासों की कमियों को अपनी अगली तैयारी का आधार बनाया. 2024 में अंतिम चरण तक पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी रणनीति पर और गंभीरता से काम किया. इसी निरंतर सुधार और मेहनत का परिणाम उन्हें 184वीं रैंक के रूप में मिला.

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साक्षी कुमारी

लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

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