सारण : सावन की दूसरी सोमवारी पर शिल्हौड़ी शिलानाथ मंदिर में जुटेंगे 50 हजार भक्त, सुबह 3 बजे से जलाभिषेक
शिलानाथ मंदिर शिल्हौड़ी, मढ़ौरा
Shilanath Temple Shilhouri : सावन की दूसरी सोमवारी पर छपरा के शिल्हौड़ी स्थित प्रसिद्ध शिलानाथ मंदिर में भारी भीड़ जुटने की संभावना है. करीब 50 हजार शिव भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंच सकते हैं. व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए सीसीटीवी और 200 वालंटियर तैनात किए जाएंगे.
Shilanath Temple Shilhouri : सारण के मढ़ौरा अनुमंडल मुख्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर शिल्हौड़ी गांव स्थित प्रसिद्ध शिलानाथ मंदिर में सावन की दूसरी सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. मंदिर कमेटी के अनुसार करीब 50 हजार शिव भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंच सकते हैं. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं और सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 200 वालंटियर तैनात किये जायेंगे.
सालोंभर आते हैं श्रद्धालु, सावन में बढ़ जाती है भीड़
छपरा-मढ़ौरा मुख्य मार्ग से सटे शिल्हौड़ी गांव में स्थित बाबा भोलेनाथ का यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां सालोंभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.
दूसरी सोमवारी पर 50 हजार भक्तों के पहुंचने की संभावना
मंदिर कमेटी के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर रिकॉर्ड भीड़ जुटने की संभावना है. करीब 50 हजार शिव भक्तों के मंदिर पहुंचने का अनुमान है. जिले के अलग-अलग प्रखंडों के अलावा पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं.
सुबह तीन बजे से शुरू होगा जलाभिषेक
सावन की दूसरी सोमवारी को मंदिर में सुबह तीन बजे से ही जलाभिषेक शुरू कर दिया जायेगा. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है.
सीसीटीवी से रखी जायेगी नजर
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं. भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गयी है.
200 वालंटियर संभालेंगे व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और मंदिर में दर्शन एवं जलाभिषेक को व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए करीब 200 वालंटियर तैनात किये जायेंगे. वालंटियर श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराने में सहयोग करेंगे.
नारद मुनि से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
शिल्हौड़ी के शिलानाथ मंदिर को देवर्षि नारद की कथा से भी जोड़ा जाता है. मान्यता के अनुसार देवर्षि नारद को अपनी तपस्या पर अहंकार हो गया था. उनके अभिमान को दूर करने के लिए भगवान विष्णु की माया से बसे नगर में राजा शिलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी का स्वयंवर रचा गया.
विश्वमोहिनी के स्वयंवर से जुड़ी कथा
कथा के अनुसार विश्वमोहिनी की हस्तरेखा में उसके वर को तीनों लोकों का स्वामी बताया गया था. उसके सौंदर्य और इस बात से प्रभावित होकर देवर्षि नारद स्वयंवर में शामिल होना चाहते थे. उन्होंने भगवान विष्णु से हरि रूप यानी आकर्षक मुखमंडल की मांग की और स्वयंवर में पहुंच गये.
वानर रूप देखकर नारद हुए क्रोधित
मान्यता के अनुसार स्वयंवर में तिरस्कृत होने के बाद नारद ने कुएं में अपना चेहरा देखा तो उनका मुख वानर जैसा दिखाई दिया. इससे वह क्रोधित हो गये. विश्वमोहिनी को लक्ष्मी और उसके वर को भगवान विष्णु के रूप में देखकर उनका आक्रोश और बढ़ गया.
नारद ने भगवान विष्णु को दिया था शाप
कथा के अनुसार क्रोधित नारद ने भगवान विष्णु को शाप दिया कि त्रेता युग में पत्नी के वियोग में भटकने के दौरान वानर ही उनकी सहायता करेंगे. बाद में देवताओं द्वारा सत्य से अवगत कराने पर नारद का मोह भंग हुआ और उनका क्रोध शांत हो गया.
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