बिंदापाथर. मंझलाडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथामृत के प्रथम दिन वृंदावन धाम के कथावाचक अंकित कृष्ण जी महाराज ने कथा सुनाया. उन्होंने श्रीमद्भागवत महात्म्य के बारे में मधुर वर्णन किया. कहा कि श्रीमद्भागवत श्रवण करना संसार का सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है, यह भगवान का वांग्मय स्वरूप है, जो जन्म जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर प्राप्त होता है न भागवत की नियति ब्रह्म होना है. कहा कि पृथ्वी लोक पर बार-बार परमात्मा का अतवरण होता है, उनकी लीलाएं होती है और गुणगान करते हुए कर्म-धर्म के साथ ही महायज्ञ होते हैं. ऐसे में परमात्मा स्वयं यहां पर जन्म लेते हैं. वे जीव के प्रेम उसकी करुण पुकार को जरूर सुनते हैं, जब भी परमात्मा का गुणानुवाद इस पृथ्वी पर होता है या परमात्मा स्वयं आकर यहां पर तरह-तरह की लीलाएं करते हैं तो देवतागण भी पृथ्वी पर जन्म लेने के लिए लालायित रहते हैं. श्रीमद्भागवत महापुराण कथा को श्रवण करने वाले भक्त निश्चित रूप से मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं, जिस प्रकार राजा परीक्षित श्राप से मुक्त हो गए. अनेकानेक राक्षस और पापी भी उस परमात्मा की कृपा से मुक्ति पा गए. ऐसे सभी पुराणों और ग्रंथों में महापुराण की संज्ञा पाने वाला श्रीमद्भागवत पुराण है, कथा का श्रवण करने के लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं. भक्तों के मन की वांछित कल्पनाओं से परे हटकर पुण्य फल प्रदान करने वाला यह महात्म्य होता है. वास्तव में श्रोता ही भागवत कथा के प्राण हैं, जिसके कल्याण के लिए इस प्रकार के अनुष्ठान किए जाते हैं. कथा के साथ साथ सुमधुर भजन संगीत एवं आकर्षित झांकी भी प्रस्तुत की गयी, जिससे उपस्थित श्रोता भावविभोर हो कर कथा स्थल पर भक्ति से झूम उठे.
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