– दो दिवसीय कीट रोग पहचान प्रशिक्षण हुआ समापन फोटो – 01 खेत भ्रमण करते किसान व अन्य संवाददाता जामताड़ा सदर प्रखंड के अमलाचातर गांव में आयोजित दो दिवसीय आइपीएम (एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन) ओरिएंटेशन प्रशिक्षण शनिवार को समापन हुआ. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसलों में लगने वाले कीट रोगों की पहचान और उसकी रोकथाम के लिए वैज्ञानिक व जैविक विधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था. कार्यक्रम प्रभारी अधिकारी अशोक कुमार एचपी, वनस्पति संरक्षण अधिकारी ने किसानों को कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व और उसके उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसान अपने खेतों में समय-समय पर निगरानी करके कीट और रोगों की पहचान कर सकते हैं और सही समय पर रोकथाम के उपाय अपनाकर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. उन्होंने किसानों को जैविक कीटनाशकों और प्राकृतिक नाशीजीव नियंत्रण विधियों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी. सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी संदीप कुमार सालवे और तकनीकी सहायक नीतीश कुमार सुमन ने किसानों को खेतों का भ्रमण कराया, जहां उन्होंने किसानों को मित्र कीट और शत्रु कीट की पहचान कराई. इस दौरान किसानों को यह समझाया गया कि कौन से कीट फसलों के लिए लाभदायक होते हैं और कौन से नुकसानदायक. किसानों को विभिन्न रबी फसलों में लगने वाले रोगों की जानकारी भी दी गयी, ताकि वे समय रहते उनकी रोकथाम कर सकें. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को एइिसा ( एग्रो इको सिस्टम एनालाइज) चार्ट का प्रदर्शन कर इसकी उपयोगिता समझाई गयी. इसके जरिए किसान स्वयं फसलों में होने वाली कीट व्याधियों की समस्या की पहचान सकते हैं. समयानुसार विभिन्न आइपीएम विधियों को अपनाकर अपने खेतों को सुरक्षित रख सकते हैं. कार्यक्रम में अधिक कीटनाशक छिड़काव से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गयी. विशेषज्ञों ने किसानों को सुरक्षित कीटनाशक छिड़काव तकनीकों के बारे में जागरूक किया. साथ ही कीटनाशकों के कलर लेबल कोड की विस्तृत जानकारी दी गयी, ताकि किसान सही उत्पादों का चयन कर सकें. फसल की गुणवत्ता को बनाए रख सकें. मौके पर कई किसान मौजूद थे.
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