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असुरक्षा व अव्यवस्थाओं के बीच प्रसिद्ध करमदहा मेला का हुआ शुभारंभ

करमदाहा मेला मकर संक्रांति पर 15 दिनों तक चलता है. 10 लाख रुपये का सीसीटीवी सिस्टम गायब, मुखिया ने घोटाले का आरोप लगाया.

नारायणपुर. नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र के करमदहा में लगने वाले 15 दिवसीय मकर संक्रांति मेला गुरुवार से शुरू हो गया. मेला का उद्घाटन पूर्व सांसद फुरकान अंसारी, अंचलाधिकारी देवराज गुप्ता, जिला परिषद उपाध्यक्ष फूल कुमारी देवी, जिला परिषद सदस्य दीपिका बेसरा, उमा चरण साव, मुखिया नुनुलाल सोरेन, समाजसेवी बीरबल अंसारी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. 15 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेला में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं, लेकिन इस बार शुभारंभ के साथ ही सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जानकारी के अनुसार इस वर्ष करमदहा मेला की नीलामी 59 लाख रुपये से अधिक की राशि में हुई है. इसके बावजूद मेला परिसर में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों का घोर अभाव देखा जा रहा है. अत्यधिक भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर नजर रखी जा सके, लेकिन मेला शुरू होने के बाद भी एक भी सीसीटीवी कैमरा सक्रिय नहीं पाया गया. इससे श्रद्धालुओं और दुकानदारों में असुरक्षा की भावना व्याप्त है. मेला में न तो शौचालय की समुचित व्यवस्था की गयी है और न ही कचरा प्रबंधन को लेकर कोई ठोस योजना दिखायी दे रही है. जगह-जगह कूड़ा बिखरा हुआ है, जिससे स्वच्छता पर सवाल उठ रहे हैं. प्रशासनिक मानकों और सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर मेला का अधूरा और अव्यवस्थित शुभारंभ किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है. मेला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि मेला से हर साल लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आंख मूंदे हुए हैं. कमेटी का दावा है कि उन्होंने बार-बार संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. इधर, मुखिया नुनुलाल सोरेन ने सीसीटीवी सिस्टम में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि लगभग 10 लाख रुपये की लागत से करमदहा मेला के लिए सीसीटीवी कैमरे और अन्य सुरक्षा सामग्री की खरीदारी की गयी थी, लेकिन वर्तमान में मेला परिसर में एक भी कैमरा उपलब्ध नहीं है. मुखिया का कहना है कि इस खरीदारी और रखरखाव की जिम्मेदारी किसे दी गयी थी, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है. उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर घोटाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. स्थानीय ग्रामीणों और मेला में पहुंचे श्रद्धालुओं का भी कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता.

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