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बिंदापाथर में हो महाविद्यालय की स्थापना, छात्र- छात्राओं को होगी सहूलियत

Updated at : 23 Dec 2024 7:25 PM (IST)
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बिंदापाथर में हो महाविद्यालय की स्थापना, छात्र- छात्राओं को होगी सहूलियत

बिंदापाथर मुख्यालय स्थित स्वामी विवेकानंद शिशु निकेतन में प्रभात खबर की ओर से "ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था " विषय पर प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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बिंदापाथर. बिंदापाथर मुख्यालय स्थित स्वामी विवेकानंद शिशु निकेतन में प्रभात खबर की ओर से “ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था ” विषय पर प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक एवं अभिभावकों ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति पर विभिन्न समस्याएं एवं उनके समाधान पर चर्चा की एवं आवश्यक सुझाव दिए. कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभात खबर परिचर्चा में भाग लेने वाले शिक्षकों व अभिभावकों का स्वागत किया गया. इसके पश्चात विद्यालय के शिक्षकों एवं अभिभावकों ने शिक्षा के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा तो मिल ही जाती है, मगर उच्च शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को लंबी दूरी तय करना पड़ता है. लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र के छात्र- छात्राओं को करीब 20 किलोमीटर दूरी तय कर जामताड़ा महाविद्यालय जाना पड़ता है. ग्रामीण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण खासकर लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है. परिचर्चा पर हिस्सा लेते हुए लोगों ने कहा कि बिंदापाथर क्षेत्र में एक महाविद्यालय का होना अति आवश्यक है, ताकि छात्र-छात्राओं को दसवीं के बाद आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए कोई बाधाएं उत्पन्न ना हो. लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज आने जाने के लिए अपने अभिभावकों पर निर्भर होना पड़ता है. इस गरीब क्षेत्र में अनेकों अभिभावकों को रोजी-रोटी की जुगाड़ के लिए वक्त नहीं मिलता है. ऐसे में अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज कैसे ले जायेंगे. क्या कहते हैं स्थानीय लोग ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी उच्च विद्यालय में उच्च योग्यताधारी शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. मगर मध्य विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय में अभी भी शिक्षकों की कमी है. – राहुल सिंह सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों से कई तरह के गैर शैक्षणिक कार्य कराये जाते हैं, जिससे वह शिक्षक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पाते हैं. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. – नलिन गोराई जिले में शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय, तकनीकी महाविद्यालय, मेडिकल संस्थान, व्यवसायिक शिक्षा शिक्षा की व्यवस्था नहीं है. इस पर पहल करने की आवश्यकता है. – संतोष सिंह ग्रामीण क्षेत्र में भी शिक्षा का माहौल है. अभिभावक अपने रोजगार का अधिकांश राशि बच्चों की पढ़ाई में खर्च कर रहे हैं. इससे लोगों में पढ़ाई के प्रति जागरुकता आयी है – प्रशांत मंडल सरकारी विद्यालय में उपयुक्त शैक्षिक व्यवस्था नहीं है. इस कारण लोग अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में नामांकन कराते हैं. सरकारी विद्यालयों में भी अच्छी पढ़ाई होनी चाहिए. – कामदेव सिंह धीरे-धीरे ही सही मगर ग्रामीण क्षेत्र में भी बच्चे पढ़ रहे हैं. अभी भी कुछ-कुछ जगहों पर अभिभावकों की रुचि नहीं रहने के कारण बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है. – विशु मुर्मू

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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