संतों ने सुहागिन को परिजनों से मिलाया

Published at :14 Oct 2016 3:26 AM (IST)
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संतों ने सुहागिन को परिजनों से मिलाया

खुशी. महीनों तक कार्रवाई नहीं होने पर संत खुद सुहागिन को लेकर पहुंचे मिहिजाम बच्ची को सकुशल पाकर खुश हैं परिजन भटक कर चली गयी थी पंजाब मिहिजाम : जामताड़ा से गुम हुई एक 16 वर्षीय मानसिक रूप से बीमार आदिवासी युवती सुहागिनी मरांडी को पंजाब के संत जत्थेदारों ने उसके माता-पिता को मिहिजाम थाने […]

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खुशी. महीनों तक कार्रवाई नहीं होने पर संत खुद सुहागिन को लेकर पहुंचे मिहिजाम बच्ची को सकुशल पाकर खुश हैं परिजन

भटक कर चली गयी
थी पंजाब
मिहिजाम : जामताड़ा से गुम हुई एक 16 वर्षीय मानसिक रूप से बीमार आदिवासी युवती सुहागिनी मरांडी को पंजाब के संत जत्थेदारों ने उसके माता-पिता को मिहिजाम थाने में सुपूर्द कर दिया. यह युवती भटक कर पंजाब चली गयी थी. पंजाब से आये सिक्ख जत्थेदारों ने इंसानियत का परिचय देते हुए युवती को उसके माता पिता से मिलाने के लिए पंजाब के मुक्तसर जिला से युवती को लेकर मिहिजाम गुरुद्वारा पहुंचे. पंत के संत जत्थेदार कृपाल सिंह ने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह से वार्ता कर युवती के बारे में जानकारी दी थी. मिहिजाम थाने में युवती के माता पिता को युवती को सौंपा गया. इस दौरान मिहिजाम थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह, श्यामलाल हेम्ब्रम, रजाउल रहमान, प्रो कैलाश साव, राजेन्द्र शर्मा, कमलजीत सिंह आदि कई गणमान्य लोग मौजूद थे.
जामताड़ा के मेझिया पंचायत क्षेत्र के लिपीडीह टोला निवासी बच्ची के पिता सुबोधन मरांडी ने बताया कि जनवरी महीना से ही हमारी बच्ची सुहागिनी मरांडी की मानसिक स्थिति खराब रहने के कारण घर से कहां चली गई पता नहीं चला. काफी खोजबीन की, लेकिन सुहागिनी नहीं मिली. उसके लापता होने की सूचना पुलिस को भी दिया था. कुछ दिनों पूर्व ही हमे संत कृपाल सिंह से फोन पर वार्ता हुई. उन्होंने सुहागिनी के बारे में बताया और उसके लौटने का इंतजार करने लगे,
परंतु प्रशासन ने बच्ची को पंजाब से लाने में कोई पहल नहीं किया. पिता ने जत्थेदारों को धन्यवाद दिया. पिता सुबोधन ने बताया कि सुहागिनी गर्ल्स हाई स्कूल की कक्षा 10वीं की सेंटप परीक्षा देने के बाद से उसका दिमाग में कुछ गड़बड़ी आ गई. जिसके बाद तीन बार कुल्टी में भी इलाज करवाया. अब बच्ची आ गयी है सभी घर वाले खुश हैं.
क्या कहा जत्थेदार मुख्य सेवक ने
इस मामले में जत्थेदार मुख्य सेवक कृपाल सिंह ने बताया कि छह महीने पूर्व किसी तरह बच्ची ट्रेन में बैठ कर मलोठ आ गई और रेलवे टीटी ने स्टेशन पर उतार दिया. नशाबंदी पर काम करने वाली कीहुतो जागो नशे त्यागो बच्चे पढ़ाओ पैसे ने बचाओं पटियाला की पिंगलवाला संस्था की नजर युवती पर पड़ी और हमें फोन किया. बच्ची से पूछताछ किया, परंतु बच्ची आदिवासी भाषा में बात बोल रही थी, जो समझ में नहीं आया. दुबारा पूछा कि आप पढ़े लिखे हो तो उसने अंग्रेजी में कहा यस सर, फिर उसको एक डायरी दी और अपना पता लिखने को कहा उसने अपना पता झारखंड राज्य के जामताड़ा जिला का दिया. उसके बाद जामताड़ज्ञ के प्रशासन से बात किया और बच्ची के बारे में सारी जानकारी दी. प्रशासन ने बच्ची को ले जाने के लिए आश्वासन दिया, परंतु छह महीना बीतने के बावजूद बच्ची को लेने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस बीच हमने दुबारा प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन फिर आश्वासन मिला. उसके बाद हमने मिहिजाम गुरुद्वारा प्रबंधन के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह छावड़ा से संपर्क किया और बच्ची को साथ लेकर आया. कृपाल सिंह ने बताया कि इतने दिनों के मध्य बच्ची को टाइफाइड रोग भी पकड़ लिया, परंतु उसका इलाज कराया और अपनी बेटी की तरह इस बच्ची को रखा.
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