ओके... जमीनी हकीकत/ विकास के लिए तरस रहा शिमलाडंगाल पंचायत

Published at :06 Dec 2014 9:02 PM (IST)
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ओके...  जमीनी हकीकत/ विकास के लिए तरस रहा शिमलाडंगाल पंचायत

फोटो : 6 जाम 28,29,30,31,32 प्रतिक्रिया देते ग्रामीण फतेहपुर : शिमलाडंगाल पंचायत आज भी मूलभूत सुविधा से दूर है. पंचायत अंतर्गत कुल 16 राजस्व गांव है. जिसमें दर्जनों टोला है. पंचायत में एक भी उच्च विद्यालय व स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. पंचायत के शिमलाडंगाल गांव में लगभग छह महीना से ट्रांसफॉर्मर खराब है. जिसको लेकर […]

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फोटो : 6 जाम 28,29,30,31,32 प्रतिक्रिया देते ग्रामीण फतेहपुर : शिमलाडंगाल पंचायत आज भी मूलभूत सुविधा से दूर है. पंचायत अंतर्गत कुल 16 राजस्व गांव है. जिसमें दर्जनों टोला है. पंचायत में एक भी उच्च विद्यालय व स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. पंचायत के शिमलाडंगाल गांव में लगभग छह महीना से ट्रांसफॉर्मर खराब है. जिसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक को जानकारी दी. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. वहीं शिमलाडंगाल एवं आसना गांव के बीचों-बीच जोरिया पर पुलिया निर्माण की मांग ग्रामीण लंबे अरसे से करते आ रहे हैं. अबतक पुल बनाने को लेकर किसी ने ध्यान नहीं दिया. मुरीडीह गांव के पहाडि़यापाड़ा में ग्रामीण आज भी लालटेन युग में जी रहे हैं. इस गांव के आदिवासी टोला एवं कोरापाड़ा आदिवासी टोला के ग्रामीण अदद पीसीसी सड़क के लिये तरस रहे हैं. जिसे देखने वाला कोई नहीं है. खैरबनी गांव में पांच चापानल में से मात्र एक ठीक है. जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिये भटकना पड़ता है. क्या कहते हैं ग्रामीण :झारखंड राज्य बनने के बाद भी आदिवासियों की दशा और दिशा नहीं सुधरी है. आज भी आदिवासी गांव विकास के लिये तरस रहे हैं.-शेलेन हेंब्रम चुनाव के समय नेता आकर बड़ी-बड़ी घोषणा करते हैं और बाद में भूल जाते हैं.- क्र ांति गोस्वामी गांवों के विकास के लिये जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन को कोई मतलब नहीं है. इस बार के विस चुनाव में वैसे जनप्रतिनिधि को चुनेंगे जो जनता के सुख-दुख में साथ दें. – हरिपद गोस्वामीपूरे पंचायत में स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था नहीं है. जिसके कारण ग्रामीणों को झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे ही रहना होता है. उच्च शिक्षा के लिये यहां एक भी उच्च विद्यालय नहीं है. – भोलानाथ सेन

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