Jamshedpur News :टाटा समूह की कंपनियों में महिला कर्मियों की भागीदारी बढ़ी, ट्रेड यूनियनों में महिलाओं की भागीदारी अब भी नगण्य

Edited by RAJESH SINGH
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : भारत में ट्रेड यूनियनों का 100 वर्षों से भी पुराना इतिहास है, लेकिन आज भी इनमें महिलाओं की भागीदारी अत्यंत सीमित है.

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Jamshedpur News :

भारत में ट्रेड यूनियनों का 100 वर्षों से भी पुराना इतिहास है, लेकिन आज भी इनमें महिलाओं की भागीदारी अत्यंत सीमित है. जमशेदपुर की अधिकांश कंपनियों में इंटक से संबद्ध यूनियनें सक्रिय हैं, किंतु नेतृत्व की बागडोर अब भी पुरुषों के हाथ में ही है.

राजनीति और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की गयी है. राजनीति में 33% और पंचायतों में कई राज्यों में 50% आरक्षण. इसके विपरीत, ट्रेड यूनियनों में महिलाओं के लिए कोई आरक्षित सीट नहीं है. महिलाएं सामान्य श्रेणी में चुनाव जीतकर यूनियन कमेटी में सदस्य जरूर बन रही हैं, लेकिन नेतृत्वकारी भूमिकाओं में उनकी उपस्थिति नगण्य है. महिला इंटक की राष्ट्रीय अध्यक्ष देविका सिंह जमशेदपुर से हैं, लेकिन शहर की तमाम कंपनियों के यूनियनों में नेतृत्वकारी भूमिका में महिला श्रमिकों की भागीदारी अभी भी ना के बराबर है. शहर की कई यूनियनों में महिलाओं की भागीदारी पूरी तरह नगण्य है. इन यूनियनों में टिमकेन, टीएसडीपीएल, न्यूवोको सहित अन्य कंपनियों की यूनियनें शामिल है.

टीआरएफ लेबर यूनियन इकलौती ऐसी यूनियन है, जहां बेबी कुमारी को वाइस प्रेसिडेंट और प्रिया महतो को कोषाध्यक्ष चुना गया है. 1907 में टिस्को की स्थापना के साथ ही जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन की स्थापना हुई, जो बाद में टाटा वर्कर्स यूनियन बन गयी. वर्तमान में यूनियन में कमेटी मेंबर का 214 पद में 2 सीट पर महिलाएं कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन में कमेटी मेंबर का 85 पद है, जिसमें दो महिला कमेटी मेंबर है. टाटा टिनप्लेट डिवीजन, वायर प्रोडक्ट लेबर यूनियन में महिला कमेटी मेंबर की संख्या एक-एक है. कामगार महिलाओं की पहचान हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पुरुष प्रधान श्रम-बाजार में उनको कई समस्याओं का हर स्तर पर और हर क्षेत्र में सामना करना पड़ता है.

कंपनियों में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

हालांकि टाटा समूह की कंपनियों में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है. टाटा मोटर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 11% है और शॉप फ्लोर पर नये कर्मचारियों में लगभग 25% महिलाएं हैं. टाटा स्टील ने 2025 तक महिला भागीदारी को 25% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल 6.5% है. हाल ही में कंपनी ने 23 महिला अग्निशामकों को नियुक्त कर एक महत्वपूर्ण पहल की.

वर्जन….

टाटा स्टील में सभी फोरम में महिलाओं की भागीदारी है. टाटा वर्कर्स यूनियन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रस्ताव यूनियन नेतृत्व के समक्ष रखा जायेगा.

बबीता सुनील, कमेटी मेंबर, टाटा वर्कर्स यूनियन

महिलाएं सभी क्षेत्रों में आगे आ रही हैं. अपनी योग्यता, सूझबूझ से काम कर रही हैं. महिलाओं को ट्रेड यूनियन में भी आगे आने की जरूरत है.

निशानिधि, कमेटी मेंबर, टाटा वर्कर्स यूनियन

महिलाओं की संख्या ट्रेड यूनियन में बढ़नी चाहिए. उन्हें भी नेतृत्व का मौका मिलना चाहिए. लंबे समय से यूनियन में हूं. सभी का सहयोग मिल रहा है. महिलाओं को आगे लाने की जरूरत है.

लवि शर्मा, कमेटी मेंबर, टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन

ट्रेड यूनियन राजनीति से अलग है. ट्रेड यूनियन में महिलाओं की कमी चिंताजनक है. महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए.

भारती रानी, कमेटी मेंबर, टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन

महिलाओं के जिम्मे ऑफिस से लेकर घर तक की सारी जिम्मेदारी होती है. टाटा समूह की कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. महिलाओं को भी आगे आने की जरूरत है.

सुजाता मित्रा, कमेटी मेंबर, वायर प्रोडक्ट लेबर यूनियन

महिलाएं आज के समय में सभी क्षेत्रों में पुरुष के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं. ट्रेड यूनियन में भी महिलाओं को आगे आने की जरूरत है.

मिठू दत्ता, कमेटी मेंबर, टाटा टिनप्लेट डिवीजनB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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